अंबिकापुर।खबरी गुल्लक।
नगर निगम अंबिकापुर में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अमृत मिशन योजना के तहत विभिन्न वार्डों में बनाए गए बाल उद्यान देखरेख में लापरवाही की वजह से अब बदहाल हो रहे हैं। यहां लगाए गए हरे घास सुख रहे हैं साथ ही झूले भी टूट रहे हैं। इसके पीछे का प्रमुख कारण उद्यान की देखरेख करने वाली स्वयं सहायता समूह की बहनों को मानदेय नहीं मिलना को बताया जा रहा है। समूह की बहनों का आरोप है कि उन्हें लगभग 10 महीने से मानदेय नहीं मिला है। जिसके चलते उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पर रहा है। बच्चों के एडमिशन, पाठ्य सामग्री की खरीददारी में भी आर्थिक तंगी से परेशानी हो रही है। लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के चलते पार्क देखरेख का काम अब बोझ बन गया है। खाली पेट कैसे काम होगा। महिलाओं का कहना है कि ऐसी स्थिति में काम में मन नहीं लग रहा। निगम के अधिकारियों से राशि की मांग की रही है मगर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सरकार की नाकामयाबी है यह- द्वितेंद्र मिश्रा
नगर के पूर्व एमआईसी सदस्य और कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महा सचिव द्वितेंद्र मिश्रा ने खबरी गुल्लक से चर्चा करते हुए बताया कि निगम में जब कांग्रेस की सरकार थी उस दौरान अमृत मिशन योजना के तहत शहर के गांधीनगर, मुक्ति पारा, दर्री पारा सहित अन्य स्थानों पर बाल उद्यान का निर्माण कराया गया था। शुरुआती वर्ष में पार्क के देखरेख का जिम्मा ठेकेदार का था, फिर स्वयं सहायता समूह को दे दिया गया। मौजूदा समय में निगम में सरकार बदल गई है इसके बाद भी विभिन्न समस्याओं को लेकर शहरवासी उनके पास आते हैं। उन्होंने बताया कि लोगों की समस्याओं को तत्परता पूर्वक दूर करने के चलते लोग उम्मीद लेकर उनके पास आते हैं। बाल उद्यान की महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों ने बताया कि उन्हें पिछले 10 महीने से मानदेय नहीं मिला है। द्वितेंद्र मिश्रा ने कहा कि उद्यान का देखरेख करने वाली महिलाओं को हर हाल में समय पर मानदेय चाहिए।पार्षदों का डेढ़ करोड़ का मानदेय बकाया
नगर के पूर्व एमआईसी सदस्य और कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महा सचिव द्वितेंद्र मिश्रा ने खबरी गुल्लक से चर्चा करते हुए बताया कि नगर निगम के 46 वार्ड के पूर्व पार्षदों को शासन से मिलने वाला मानदेय बकाया है। उन्होंने बताया कि लगभग 22 महीने का डेढ़ करोड़ से अधिक राशि का भुगतान पार्षदों को नहीं किया गया है। नगर निगम में भाजपा की सरकार आए लगभग दो साल हो जाने के बाद भी पार्षदों के बकाया राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में लगाए गए याचिका में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने फैलाया में कहा था कि 3 माह के भीतर पार्षदों के लंबित मानदेय का भुगतान होना चाहिए। मगर उच्च न्यायालय के इस आदेश का पालन भी सरकार नहीं कर पाई है।





