भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने राजस्व अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को बताया अवैध... कलेक्टर को ज्ञापन सौंप सेवा समाप्ति, निलंबन की मांग

भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने राजस्व अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को बताया अवैध... कलेक्टर को ज्ञापन सौंप सेवा समाप्ति, निलंबन की मांग

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अंबिकापुर ।। खबरी गुल्लक।।

जिला भाजपा विधि प्रकोष्ठ के जिला संयोजक  जन्मेजय पाण्डेय ने आज 29 मई 2026 को कलेक्टर सरगुजा को एक त्वरित कार्यवाही हेतु ज्ञापन सौंपा, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन कलम बंद हड़ताल को अवैध बताते हुए उनकी सेवा समाप्ति या निलंबन की सजा देने की मांग की गई है। पार्टी ने हड़ताल को आम जनता के अधिकारों का हनन तथा प्रशासन पर अनुचित दबाव डालने वाला कृत्य करार दिया है।

पत्र में क्या कहा गया?

 राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों की यह हड़ताल पूरी तरह गैरकानूनी और अवांछित है।  

 उच्चतम न्यायालय के प्रतिष्ठित निर्णय टी.के. रंगराजन बनाम तमिलनाडु (2003) का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।  

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-6 का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि सेवा से संबंधित कोई भी विवाद होने पर काम बंद करना, सामूहिक अवकाश पर जाना या पेन-डाउन आंदोलन करना गंभीर कदाचार माना जाता है।  

राजस्व विभाग के कामकाज के रुकने से आम नागरिक, किसान और छात्र विशेष रूप से प्रभावित होंगे, क्योंकि यह विभाग अर्ध-न्यायिक और अनिवार्य सेवाएं संचालित करता है।  

 पाण्डेय ने दावा किया कि हड़तालकारियों का उद्देश्य सीतापुर विधायक के विरुद्ध दर्ज अपराध मामले में शासन पर दबाव बनाना है, जिससे पूरी जांच प्रभावित होने की आशंका है।   छत्तीसगढ़ सिविल सेवा संहिता एवं अत्यावश्यक सेवा अधिनियम के तहत कारगर कार्रवाई करते हुए हड़तालकारियों के विरुद्ध सेवा समाप्ति या निलंबन की कार्रवाई अति शीघ्र की जाए।

यह दिया गया उदाहरण

पत्र में उद्धृत टी.के. रंगराजन बनाम तमिलनाडु (2003) के फैसले का उपयोग कर भाजपा ने यह तर्क भी प्रस्तुत किया है कि संवैधानिक एवं विधिक आधारों के नाम पर सरकारी सेवा से जुड़े कर्मियों को हड़ताल पर जाने का अधिकार नहीं है। साथ ही, छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 का हवाला देते हुए कहा गया है कि ऐसी हड़तालें अनुशासनात्मक दंड के दायरे में आती हैं।

आमजन हलकान

 स्थानीय किसान और आम जनप्रतिनिधियों ने बताया कि राजस्व कार्यालयों के बंद रहने से भूमि, पंजीकरण व सरकारी प्रमाणपत्र संबंधी कामकाज ठप हो गया है, जिससे समयबद्ध योजनाओं और फसलों से जुड़े सरकारी लाभों में देरी हो सकती है।  


विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा हड़ताल जैसी कार्रवाई सामाजिक व प्रशासनिक असामंजस्य को उजागर करती है। जबकि कर्मचारियों के वैध मांगों को सुनना आवश्यक है, परन्तु अर्ध-न्यायिक विभागों के कामकाज में बाधा सीधे जनता के अधिकारों और शासन के तंत्र पर प्रभाव डालती है। कानून के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार निवारक कदम उठाने व मध्यस्थता दोनों विकल्प संभव हैं।



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