अम्बिकापुर/ मैनपाट।।। खबरी गुल्लक।।
सरगुजा सरगुजा संभागीय आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने एक महत्वपूर्ण राजस्व विवाद संबंधी आदेश पारित करते हुए कलेक्टर अम्बिकापुर द्वारा 8.अगस्त 2025 में पारित आदेश को वैध व प्रभावशील ठहराया। यह आदेश अचिन्त्य पाण्डेय व अन्य पुनरीक्षणकर्ता द्वारा कलेक्टर अम्बिकापुर के विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका पर आया है। विवादित भूखंड ग्राम आमगांव तहसील मैनपाट खसरा सं. 63/21 (रकबा 0.506 हेक्टेयर / 1.25 एकड़ के अतिरिक्त अन्य तारीखों के अनुसार कुल 4.35 एकड़ भी अंकित)। उक्त भूमि पर वर्ष 1974‑75 में तहसीलदार कार्यालय के रा०प्र०क० 10/3‑19/1974‑75 के अभिलेख में रेवती प्रसाद सुखनन्दन को पांच वर्षों के लिए पट्टा प्रदान किया गया था। बाद में कलेक्टर सरगुजा ने 14.09.2023 को विक्रय की अनुमति दी और 22.09.2023 को पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से पुनरीक्षणकर्ता अचिन्त्य पाण्डेय आ० संजीत कुमार पाण्डेय के नाम पर विक्रय पत्र निष्पादित हुआ। उत्तरवादी उमा कुमारी पत्नी चन्द्रबली ग्राम आमगांव मैनपाट है। उत्तरवादी ने शिकायत की कि पुनरीक्षणकर्ता ने अपनी खरीदी हुई खसरा 63/21 के अलावा खसरा 63/96 पर अनाधिकृत कब्जा कर निर्माणकार्य कराया है और विक्रय पत्र में कथित तौर पर वन क्षेत्र का अंश शामिल है। उत्तरवादी का यह भी आरोप था कि कूटरचित दस्तावेज व प्रभाव का दुरुपयोग कर विक्रय पत्र बनवाया गया तथा नक्शा चौहद्दी की तरमीम राजस्व निरीक्षक से करवाई गई।
अनुविभागीय अधिकारी सीतापुर में पहले भी शिकायत आयी; प्रारंभिक जाँच में वह शिकायत निराधार पाई गई और निरस्त कर दी गई। उत्तरवादी ने फैसले के विरुद्ध अपील की और उच्च न्यायालय में स्थगन आदेश भी प्राप्त किया गया था। स्थगन के कारण विचारण न्यायालय ने 31.07.2025 को नस्तीबद्ध करने का आदेश पारित किया था। उत्तरवादी की ओर से नक्शा व सीमांकन को लेकर अपर कलेक्टर सरगुजा को जाँच के लिए निर्देश दिए गए। अपर कलेक्टर की टीम ने मौके पर मौका‑जाँच रिपोर्ट 16.07.2025 प्रस्तुत की जिसमें कहा गया कि वादभूमि पर प्राकृतिक रूप से सघन वृक्षों वाला जंगल है और वास्तविक स्थिति विक्रय पत्र में अंकित विवरण से मेल नहीं खाती है। जाँच प्रतिवेदन में मौके पर 84 वृक्ष 55 सरई सहित होने का उल्लेख है जबकि विक्रय पत्र में केवल 1 सरई अंकित था; इससे निष्कर्ष निकला कि नक्शा व चौहद्दी में अनियमितता संभव है और भूमि वनभूमि की श्रेणी में भी आ सकती है।
अपर कलेक्टर के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विचारण न्यायालय ने 8. 8.2025 को पुनरीक्षणकर्ता एवं मूल पट्टेदार को सुनवाई हेतु आहूत किया ताकि नक्शा‑चौहद्दी व पट्टे की वैधता की जाँच की जा सके। इस कार्रवाई को अदालत ने प्रशासनिक प्रक्रिया व शासनहित में विधिसंगत ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पुनर्विलोकन विक्रय अनुमति की चुनौती नहीं थी, बल्कि सीमांकन एवं पट्टे की शर्तों के पालन की जाँच सुनिश्चित करने हेतु था।
पुनरीक्षणकर्ता का तर्क था कि विक्रय अनुमति 14.9.2023 वैध और अंतिम है और उस पर समकक्ष अधिकारी द्वारा जाँच करने का अधिकार नहीं है; साथ ही कहा गया कि पट्टा वर्ष 1975 में जारी हुआ था और 50 वर्ष बाद प्रस्तुत पुनरीक्षण अस्वीकार्य है। पुनरीक्षणकर्ता ने यह भी कहा कि पंजीकृत विक्रय पत्र की वैधता का निर्णय नागरिक न्यायालय व्यवहार न्यायालय का क्षेत्राधिकार है। उत्तरवादी ने अपनी लिखित दलीलों में अपवादस्वरूप कहा कि विक्रेता का कभी भी भौतिक कब्जा नहीं रहा जाम तथा प्रभावित पक्षकारों व हल्का पटवारी को आहूत कर मौके की जाँच करवाई गयी जिसमें गवाह व पक्षकारों के कथन लिये गये।
संभागायुक्त ने यह दिया आदेश
संभागीय आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने सभी दलीलों, जाँच प्रतिवेदनों व गोपनीय‑ नागरिक आदेशों का सम्यक अवलोकन किया। उन्होंने निर्णय दिया कि विचारण न्यायालय कलेक्टर‑स्तर द्वारा 08.08.2025 को लिया गया निर्णय विधिसंगत व प्रशासनिक प्रक्रिया के अंतर्गत है; विशेषकर तब जब मौके पर सघन वनक्षेत्र होने व शासनहित जुड़ा हो। पुनरीक्षणकर्ता के यह तर्क कि समकक्ष अधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार का जाँच अधिकार अस्वीकार्य है, संभागीय आयुक्त ने अस्वीकार कर दिया और कहा कि स्वप्रेरणा पर या शिकायत के आधार पर की गई जाँच, सीमांकन‑विषयक प्रश्न उठने पर मान्य है। आदेश में यह भी कहा गया कि संहिता की धारा 51 के तहत पूर्व आदेश का पुनर्विलोकन केवल निर्धारित प्रावधानों व वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति पर सम्भव है; परंतु इस मामले में जाँच‑कार्यवाही सीमांकन व वनाधिकारों के संदर्भ में की गयी थी न कि विक्रय अनुमति‑शक्ल का प्रत्यक्ष निष्पादन रद्द करने हेतु। अतः संभागायुक्त ने कलेक्टर अम्बिकापुर के रा०प्र०क० 10/ब‑121/2024‑25 में पारित आदेश 8.08.2025 को वैध, विधिसम्मत और प्रभावी रखते हुए पुनरीक्षण याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। न्यायालय ने पुनरीक्षणकर्ता की याचिका अग्राह्य कर दी।
संभागीय आयुक्त का आदेश इस बात पर बल देता है कि वनक्षेत्र अथवा सघन वृक्षों वाली भूमि के मामलों में प्रशासनिक जाँच व मौके‑ जांच आवश्यक है और ऐसे मामलों में शासनहित को ध्यान में रखकर सीमांकन व पट्टे की शर्तों की जाँच की जा सकती है। पंजीकृत विक्रय पत्र की वैधता पर स्पष्टता यह है कि उस वैधता की अंतिम जाँच कुछ मामलों में अन्य न्यायालयों व्यवहार न्यायालय में हो सकती है, पर सीमांकन/ वनवर्गीकरण जैसे प्रशासनिक प्रश्नों की प्रांतीय, जिलास्तरीय जाँच का अधिकार राजस्व प्रशासन के पास बना रहता है।




