Kolkata: After schools, Vande Mataram is compulsory in madrasas too: कोलकाता: स्कूलों के बाद मदरसों में भी वंदे मातरम् अनिवार्य, शुभेंदु सरकार का आदेश जारी

Kolkata: After schools, Vande Mataram is compulsory in madrasas too: कोलकाता: स्कूलों के बाद मदरसों में भी वंदे मातरम् अनिवार्य, शुभेंदु सरकार का आदेश जारी

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कोलकाता।।खबरी गुल्लक ।।

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के मदरसों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का अनिवार्य पाठ लागू करने का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देशानुसार जारी किए गए मदरसा शिक्षा संबंधी आदेश में कहा गया है कि सभी मॉडल मदरसे, सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसें, अनुमोदित शिशु शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा केंद्र तथा राज्य अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी  मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगीत का पाठ किया जाना अनिवार्य होगा।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रगीत का पाठ कक्षाओं की शुरुआत से पहले आयोजित प्रार्थनाओं के दौरान शैक्षिक अनुशासन का हिस्सा होगा और इससे प्रार्थनाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने का उद्देश्य है। मदरसा शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रभावना को पुष्ट करने के इरादे से लिया गया है।

शाहिद अख्तर ने किया स्वागत

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रो. शाहिद अख्तर ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि सभी मदरसों और शैक्षिक संस्थानों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को पूरी निष्ठा के साथ गाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह देश की बात है, इसे सभी राज्यों को अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा के माध्यम से देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना आवश्यक है।

सरकार के आदेश पर मिली प्रतिक्रिया

आदेश पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विविध प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ समूहों ने इसे स्वागतयोग्य कदम बताया है और कहा है कि इससे राष्ट्रीय एकजुटता को बल मिलेगा। वहीं कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि धार्मिक शिक्षा संस्थानों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लागू करने का तरीका सहज और संवादात्मक होना चाहिए, ताकि किसी भी धार्मिक भावनाओं में असहजता न उत्पन्न हो।

हुमायूं कबीर के विवादास्पद बयानों पर सियासी हलचल

 तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर के हालिया बयानबाजी से विवाद खड़ा कर दिया है। कबीर ने शुभेंदु अधिकारी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कुर्बानी गाय की भी होगी, बकरे और ऊंट की भी होगी और दावा किया कि यदि सरकार कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश करेगी तो उसके लिए मुश्किलें खड़ी होंगी। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी दोनों ने चिंता व्यक्त की है। कई नेताओं ने इस प्रकार की बयानबाज़ी को अशांतिपूर्ण करार दिया और शांति बनाए रखने की अपील की।

 प्रशासनिक दृष्टिकोण और संवैधानिक पहलू

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकारों का अधिकार है कि वे सरकारी और सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों के संचालन व पाठ्यक्रम संबंधी दिशा-निर्देश जारी करें, परंतु धार्मिक संस्थानों में सांस्कृतिक या धार्मिक प्रथाओं को प्रभावित करने वाले निर्देश देते समय संवैधानिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक आज़ादी जैसे संवैधानिक अधिकारों का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। कुछ कानूनी विश्लेषक सुझाव दे रहे हैं कि यदि किसी पक्ष को आदेश से आपत्ति हो तो वह न्यायालय का सहारा ले सकता है और ऐसे मामलों में संवैधानिक परीक्षण आवश्यक हो सकता है।



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