ब्रेकिंग: जन पर्यावरण संरक्षण मंडल मैनपाट ने 4 नए बॉक्साइट खदान खनन के विरोध में किया एक दिवसीय धरना का एलान, जनसुनवाई प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल..! पर्यावरण स्वीकृति के लिए 23 जून से शुरू होगी जनसुनवाई

ब्रेकिंग: जन पर्यावरण संरक्षण मंडल मैनपाट ने 4 नए बॉक्साइट खदान खनन के विरोध में किया एक दिवसीय धरना का एलान, जनसुनवाई प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल..! पर्यावरण स्वीकृति के लिए 23 जून से शुरू होगी जनसुनवाई

khabrigullak.com
By -
0

अम्बिकापुर/ मैनपाट।। 21 जून 2026

छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम मशहूर सरगुजा जिला का प्रमुख पर्यटन केंद्र मैनपाट पहले से ही वनों की अंधाधुन कटाई, वन और राजस्व भूमि में अतिक्रमण से हरी भरी ठंडी वादियां आबो हवा खत्म हो रही हैं। बक्साइड दोहन के नाम पर मैनपाट के बड़े भू भाग को उजाड़ दिया गया है। आदिवासी अंचल में इस खदान के विस्तार से बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित भी हुआ है। वहीं अब पुनः चार गांवों में खदान विस्तार के लिए कवायद ने एक बार फिर से वनवासियों की नींद उड़ा दी है। आज  23 जून से अलग अलग क्षेत्र के लिए पर्यावरण मंजूरी के लिए जनसुनवाई होगी। इधर खदान विस्तार की खबर से चिंतित ग्रामीणों के द्वारा जनसुनवाई के विरोध का निर्णय लिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जल जंगल जमीन अब और उजड़ने नहीं देंगे। जनसुनवाई का पुरजोर विरोध किया जाएगा। 

               इधर जन पर्यावरण संरक्षण मंडल मैनपाट  ने राज्य के खनन तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मसलों को लेकर 25 जून 2026 को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन के सदस्य कृष्ण नंदन सिंह सेवा निवृत शिक्षक  ने मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ एवं संबंधित अधिकारियों को  ज्ञापन भेजकर कहा है कि धरना के पीछे प्रमुख कारण जनसुनवाई के दौरान अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी से उत्पन्न गंभीर आशंकाएँ हैं।

खबरी गुल्लक के मैनपाट संवाददाता महेश यादव ने बताया कि ज्ञापन में मंडल ने आरोप लगाया है कि   सीएमडीसी द्वारा आयोजित जनसुनवाई की तिथियाँ पहले से घोषित की गई थीं, परंतु लीज भूमि का खसरा संख्या जैसे महत्वपूर्ण तथ्य सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं किए गए। संगठन का आरोप है कि जनसुनवाई संबंधी सूचनाएँ  जानबूझकर अधूरी रखी गईं, जिससे प्रभावित जनता की भागीदारी न हो ।

यह उठाए गए सवाल

जनसुनवाई सूचना में लीज/भूमि से जुड़े खसरा नंबर न देने की बात, जिससे जनता को सही व पर्याप्त जानकारी नहीं मिली।

2010 के एक दस्तावेज़ (29/11/2010) और उससे संबंधित सेवा-समापन आदेश (01/12/2010) की समसामयिकता पर प्रश्न उठाए गए हैं, संगठन का आरोप है कि फर्जी पट्टा व अतिक्रमण के मामलों की जांच में धोखाधड़ी की आशंका है।

लगभग 1001 एकड़ भूमि से जुड़ी फर्जीवाड़े की जांच चल रही है, परंतु पूरी कार्यवाही की जानकारी प्रभावित पक्षों को उपलब्ध नहीं कराई गई।

बैंक लोन व मुआवजा संबंधी मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप और दोषियों के विरुद्ध सख्त कारवाई की मांग।

सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई गई है, अन्यथा मामला लोक आयोग, एसीबी, आर्थिक अपराध ब्यूरो व अन्य न्यायिक मंचों तक पहुंचने की चेतावनी दी गई है।

कृष्ण नंदन सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य मैनपाट को बॉक्साइट उत्खनन मुक्त क्षेत्र घोषित कराना और पर्यावरण तथा पर्यटन संरक्षण को सुनिश्चित कराना है। जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाएँ पारदर्शी और व्यापक होनी चाहिए, वरना कानूनी तथा शांतिपूर्ण आन्दोलन अपरिहार्य होंगे।

 यह ज्ञापन कलेक्टर सरगुजा, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी, प्रभारी अधिकारी कार्यालय सीएमडीसी/हाउसिंग बोर्ड और उपविभागीय अधिकारी राजस्व, सीतापुर को भी भेजा गया है। संगठन ने 25 जून को प्रस्तावित धरना प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा है कि जनसुनवाई की अनियमितताओं के कारण यह धरना अनिवार्य रूप से आयोजित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनपाट क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन संभावना को ध्यान में रखकर किसी भी खनन कार्य के निर्णय में स्थानीय समुदाय की सहमति तथा समुचित वैकल्पिक मुआवजा व पुनर्वास नीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जनसुनवाई के लिए घोषित कि गई तारीखें

विदित हो कि छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग द्वारा नोडल एजेंसी  छ.ग. मिनरल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड को नामित करते हुए शासन के द्वारा  सरगुजा के मैनपाट विकासखंड में चार बाक्साइट खदानों के लिए पर्यावरण स्वीकृति की जनसुनवाई की तारीखें निर्धारित कर दी गई हैं। 

चार खदानों में 

पहला खदान - नर्मदापुर-कुनिया रकबा 139.500 हेक्टेयर के लिए  जनसुनवाई 23 जून 2026 को होगी।  

 दूसरा खदान -  पथरई-लुरेना रकबा 79.190 हेक्टेयर जनसुनवाई: 24 जून 2026 

तीसरा खदान -  कमलेश्वरपुर रकबा 147.625 हेक्टेयर जनसुनवाई: 1 जुलाई 2026

चौथा खदान  सरभंजा रकबा 207.870 हेक्टेयर जनसुनवाई: 2 जुलाई 2026

 पत्र में कहा गया है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया को निर्धारित तिथियों पर विधिसम्मत, निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना आवश्यक है। CMDC ने स्थानीय भू-स्वामियों, जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों की व्यापक उपस्थिति की अपेक्षा जताई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कानून- व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

नदियों के अस्तित्व पर भी संकट

 मैनपाट क्षेत्र में बक्साइट खदान विस्तार से प्रमुख नदियां,झरने  टाइगर प्वाइंट, सरभंजा, जलपरी, मछली प्वाइंट, उल्टा पानी, बिसरपानी , नागाड़ंड के अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि खदान से मैनपाट क्षेत्र में पहले ही काफी विनाश हो चुका है। यदि नदियाँ भी प्रभावित हुई तो ग्रामीणों की आजीविका पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वे किसी भी हाल में क्षेत्र का विनाश नहीं होने देंगे। 




एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)