नई दिल्ली।।खबरी गुल्लक ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। बुधवार को वे प्रधानमंत्री के पद पर लगातार 4,399वें दिन तक बने रहे, जिससे उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 4,398 दिनों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को शपथ ली थी और इसके बाद 2019 व 2024 के लोकसभा चुनावों में बहुमत के साथ सत्ता में लौटे।
मोदी तीन लगातार कार्यकाल यह मुकाम हासिल करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। उनका राजनीतिक करियर और नेतृत्व देश के राजनैतिक परिदृश्य पर गहरे प्रभाव डालने वाले फैसलों के लिए जाना जाता है। पिछले 12 वर्षों में उनकी सरकार की पहलों ने प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में स्थायी परिवर्तन लाए हैं। सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और बुनियादी संरचना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालांकि आलोचक विकास की दर, बेरोजगारी और असमानता पर चिंता जताते रहे हैं और कुछ नीतिगत हस्तक्षेपों पर विवाद भी उठा। विशेषज्ञों का मत विभाजित है । कुछ इसे दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि उच्च-गुणवत्ता वाले आंकड़ों से नीतियों का प्रभाव आंका जाना चाहिए।
मुख्य उपलब्धियाँ व पहल
संवैधानिक और प्रशासनिक परिवर्तन: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने केंद्र-राज्य संबंधों और इस क्षेत्र की राजनीतिक संरचना को बदल दिया।
आर्थिक सुधार व कर प्रणाली: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में एकता आई।
डिजिटल क्रांति: नागरिक सेवाओं का डिजिटलीकरण और यूपीआई के माध्यम से डिजिटल भुगतान में व्यापक वृद्धि ने लेन-देन की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाई।
सामाजिक अभियान: स्वच्छ भारत मिशन तथा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं ने जीरो टॉलरेंस कचरा निपटान व आवासीय सुविधाओं में बढ़ोतरी की।
स्वास्थ्य उपलब्धियाँ: कोविड-19 टीकाकरण अभियान विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक रहा।
आत्मनिर्भर भारत: घरेलू उद्योगों तथा निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए विविध नीतियाँ लागू की गईं।
लोकप्रियता व अंतरराष्ट्रीय सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी को कई स्वतंत्र वैश्विक सर्वेक्षणों में लोकतांत्रिक नेताओं में उच्च रेटिंग मिली है। उन्हें 30 से अधिक देशों ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर सम्मानित किया है। यह वैश्विक स्तर पर उनकी छवि और कूटनीतिक पहुँच का प्रतिबिंब माना जाता है।
नारी सशक्तिकरण व सामाजिक पहल
सरकार ने महिला-उन्मुख कार्यक्रमों पर जोर दिया है।
32 करोड़ से अधिक महिलाओं के जन-धन खाते खोले गए।
महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन का रास्ता खुला।
3 करोड़ से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनीं।
91 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से जुड़ीं।
युवा, कौशल और नवाचार
युवा सशक्तिकरण पर जोर देते हुए सरकार ने दो करोड़ से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया। मुद्रा योजना के तहत देशभर में 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज वितरित होने का दावा किया गया है। साथ ही 2.2 लाख से अधिक स्टार्टअपों और 10 हजार से अधिक अटल टिंकरिंग लैबों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा मिला है।
आलोचना और चुनौतियाँ
विशेषज्ञों, विपक्ष और नागरिक समाज ने कुछ मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाये हैं।
आर्थिक डेटा की पारदर्शिता और बेरोजगारी दर के आंकड़े।
कुछ सामाजिक और संवैधानिक कदमों पर कांग्रेस समेत अन्य दलों की तीखी आपत्तियाँ।
संघिय और संवैधानिक संस्थाओं के बीच संबंधों पर उठते सवाल।
आगे का रास्ता
मोदी सरकार ने 12 साल के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और प्रशासनिक सुधार लागू किए हैं, परंतु अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता, रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करने के लिए आगे भी नीतिगत सतर्कता और सुधारों की आवश्यकता रहेगी। राजनीतिक रूप से, मोदी की लोकप्रियता और संगठनात्मक शक्ति उन्हें अगले वर्षों में भी प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में रखती है।




