मैनपाट में प्रस्तावित चार नई बाक्साइट खदानों की पर्यावरणीय जन सुनवाई शुरू.! पंडाल के बाहर सीएमडीसी के दलालों को जूता मारो सालों को जैसे लगते रहे नारे.., विरोध में बैठे सैकड़ों ग्रामीण

मैनपाट में प्रस्तावित चार नई बाक्साइट खदानों की पर्यावरणीय जन सुनवाई शुरू.! पंडाल के बाहर सीएमडीसी के दलालों को जूता मारो सालों को जैसे लगते रहे नारे.., विरोध में बैठे सैकड़ों ग्रामीण

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अंबिकापुर/ मैनपाट।। खबरी गुल्लक 

 छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) द्वारा मैनपाट तहसील के ग्राम नर्मदापुर और कुनिया में कुल 139.500 हेक्टेयर में प्रस्तावित बाक्साइट खनन के पर्यावरणीय मंजूरी के लिए  आयोजित जनसुनवाई में भारी संख्या में ग्रामीण, आदिवासी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व राजनीतिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। करीब 300 लोगों की उपस्थिति में संपन्न इस सुनवाई में स्थानीय लोगों ने परियोजना के संभावित पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर तीव्र आपत्ति दर्ज कराई और कड़े सुरक्षा‑नेट तथा वनाधिकारों के पूर्ण पालन की मांग की।

जनसुनवाई की कवरेज के लिए खबरी गुल्लक के मैनपाट संवाददाता महेश यादव भी मौजूद रहे,उन्होंने विरोध कर रहे ग्रामीणों ,जनप्रतिनिधियों से बातचीत भी की और जाना कि वे आखिर क्योँ विरोध कर रहे हैं,उनकी मांगे क्या है। उन्होंने बताया कि  एक तरफ जनसुनवाई होती रही,वहीं दूसरी तरफ पंडाल के बाहर ग्रामीण एक जुट होकर सीएमडीसी के दलालों को जूता मारो सालों को जैसे नारे लगाते रहे। ग्रामीणों ने कहा कि जनसुनवाई में खनन के पक्ष में केवल वही परिवार दिखे जिनके सदस्य सीएमडीसी के अधीन खदान में काम कर रहे हैं, जबकि अन्य ग्रामीण विरोध करते रहे। आज पथरई-लुरेना के लिए जनसुनवाई होगी।

जनसुनवाई में उपस्थित ग्रामीणों ने एक स्वर से कहा कि मैनपाट केवल खनिजों का भंडार नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका और पारंपरिक जीवन का केंद्र है। उल्लेखनीय रूप से स्थानीय नेताओं ने महुआ, तेंदूपत्ता, चार, हर्रा, बहेरा, इमली, साल बीज आदि से जुड़ी उपार्जन‑ प्रणालियों के व्यापक नुकसान की आशंका जताई। कई ने कहा कि खनन से जल स्रोत सूखेंगे, कृषि भूमि प्रभावित होगी और पर्यावरणीय तंत्र में स्थायी क्षति हो सकती है।

 हर माह दें 50 हजार मुआवजा - भानु प्रताप 

अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने जनसुनवाई में प्रकटीकरण करते हुए स्पष्ट कहा कि मैनपाट पेसा अनुसूचित क्षेत्र है और यहाँ संविधान की पांचवीं अनुसूचना, पेसा अधिनियम‑1996 तथा वन अधिकार अधिनियम‑2006 के नियमों का पूर्ण पालन अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्राम सभा की स्वतंत्र, पूर्व एवं सूचित सहमति  के बिना किसी भी खनन परियोजना की अनुमति ली जाना संवैधानिक और कानूनी रूप से अवैध होगा। भानु प्रताप ने उन वृक्षों और वनोपज का स्वतंत्र व वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की भी मांग की जिनसे स्थानीय लोगों की आजीविका जुड़ी है। भानु प्रताप ने यह भी सुझाया कि जिन वृक्षों के कटने से परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी, उनका प्रति वृक्ष आर्थिक मूल्यांकन कर प्रभावित परिवारों को अधिकतम 50,000 रुपये प्रति माह तक 30 वर्षों के लिए आजीविका क्षतिपूर्ति दी जाए और यह राशि महंगाई सूचकांक से जुड़ी हो। उनका तर्क था कि केवल एकमुश्त मुआवजा स्थानीय समुदायों के दीर्घकालिक नुकसान को नहीं भर सकता।

ग्रामीणों के शर्त के तहत हो संचालन - अमरजीत भगत 

जनसुनवाई में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी समर्थकों के साथ उपस्थित रहे और उन्होंने कहा कि खदान खोलने की स्थिति में सीएमडीसी को स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित गांवों के हितों का पूरा ध्यान रखना होगा। भगत ने यह भी कहा कि अक्सर खनन परियोजनाओं का लाभ स्थानीय स्तर तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचता, इसलिए संचालन ग्रामीणों की शर्तों और मांगों के अनुरूप होना चाहिए।

दस आवेदन सैकड़ों लोगों ने किया हस्ताक्षर 

जनसुनवाई के दौरान लगभग 70 लोगों ने मौखिक रूप से अपने सुझाव और आपत्तियाँ रखीं, जबकि प्रशासन को करीब 10 लिखित आवेदन प्राप्त हुए। जिसमें सैकड़ों लोगों ने हस्ताक्षर किया। अपर कलेक्टर सुनील नायक ने सभी सुझावों और आपत्तियों को रिकॉर्ड कर नियमानुसार विचार करने का आश्वासन दिया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जनसुनवाई पंडाल के बाहर विरोध में ग्रामीण नारे लगाते रहे। 

इन चार खदानों के लिए हो रही जनसुनवाई

पहला खदान - नर्मदापुर-कुनिया रकबा 139.500 हेक्टेयर के लिए  जनसुनवाई 23 जून 2026 को सम्पन्न हुई।  

 दूसरा खदान -  पथरई-लुरेना रकबा 79.190 हेक्टेयर जनसुनवाई: आज 24 जून 2026 

तीसरा खदान -  कमलेश्वरपुर रकबा 147.625 हेक्टेयर जनसुनवाई: 1 जुलाई 2026

चौथा खदान  सरभंजा रकबा 207.870 हेक्टेयर जनसुनवाई: 2 जुलाई 2026



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