जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की यह बेला हमें याद दिलाती है कि प्रकृति हमारा घर है : आकाश अग्रवाल सरगुजा संभाग अध्यक्ष ह्यूमन राइट्स एसोसियेशन

जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की यह बेला हमें याद दिलाती है कि प्रकृति हमारा घर है : आकाश अग्रवाल सरगुजा संभाग अध्यक्ष ह्यूमन राइट्स एसोसियेशन

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक 

ह्यूमन राइट्स एसोसियेशन सरगुजा संभाग के अध्यक्ष आकाश अग्रवाल ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आमजन को पौध रोपण और संरक्षण करने की अपील करते हुए कहा कि अपने  जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की यह बेला हमें याद दिलाती है कि प्रकृति हमारा घर है, और यह घर निरंतर संकट में है। जंगल, नदियाँ, हवा और मिट्टी  ये सब हमारे अस्तित्व की आधारशिला हैं। इनके बिना हमारा स्वस्थ जीवन, हमारी संस्कृति और हमारी अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं। प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है,  साफ हवा दी, खाने की फसलें दी, पानी दिया और हमारी सांस्कृतिक- आध्यात्मिक पहचान दी। परन्तु हमारी लापरवाही और छोटी-छोटी बुरी आदतों ने पर्यावरण को कमजोर कर दिया है। वनों की कटाई, जल स्रोतों का प्रदूषण, अत्यधिक प्लास्टिक, और वन्यजीवों के आवासों का विनाश  ये सब संकेत हैं कि अब कार्रवाई की आवश्यकता अत्यंत आवश्यक है।

 ह्यूमन राइट्स एसोसियेशन सरगुजा संभाग न केवल मानवाधिकारों के प्रस्तावक हैं, बल्कि हम यह मानते हैं कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण भी एक मौलिक मानव अधिकार है। इसलिए आज मैं आप सभी से तीन कदम उठाने का आग्रह करता हूँ। 

 पहला: पौध-रोपण की जिम्मेदारी अपनाइए। हर परिवार, हर विद्यालय, हर पंचायत और हर कार्यालय कम से कम एक नया पेड़ आज लगाए। पेड़ सिर्फ छाँव और सुंदरता ही नहीं देते, वे जलवायु नियंत्रित करते हैं, भूमि की रक्षा करते हैं और जैव विविधता को संरक्षित रखते हैं।

 दूसरा: लगाए हुए पौधों की देखभाल कीजिए। एक पेड़ लगाने से काम नहीं बनता उसे पानी दीजिए, देखभाल कीजिए, प्राणियों से सुरक्षा की व्यवस्था कीजिए और आवश्यकता होने पर छंटाई कीजिए। पौधे तभी फलते-फूलते हैं जब हम उन्हें निरंतर प्यार और संरक्षण दें।

तीसरा: प्लास्टिक का उपयोग घटाइए और पुनःचक्रण अपनाइए। अपने दैनिक जीवन में एक-बार-उपयोग की चीजों से बचें, पुन: प्रयोग योग्य थैलों और बोतलों का उपयोग करें, और स्थानीय स्वीप-अप कचरा प्रबंधन अभियानों में भाग लें।

            हमारे छोटे-छोटे कर्म बड़े बदलाव लाते हैं। एक पेड़ जो आज लगाया जाएगा, कल की ताजा हवा, ठंडी छाँव और जीवनदायी वर्षा में योगदान देगा। जब हम सब मिलकर काम करेंगे, समुदाय, छात्र, किसान, व्यापारी और नौजवान  तभी हम पर्यावरण संकट का सामना कर पाएँगे।

उन्होंने कहा कि आज ही अपने परिसर, गली और खेतों में पौधा लगाएं। स्कूलों और समुदायों में एक घर  एक पेड़ और हर मोहल्ला हरा-भरा जैसी पहल शुरू करें। स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सार्वजनिक स्थानों पर वृक्षारोपण और संरक्षण के लिए लॉन्ग-टर्म योजनाएँ बनवाएँ। पेड़ और प्राकृतिक स्थानों की रक्षा के लिए जागरूकता फैलाएँ, बच्चों को प्रकृति का महत्व सिखाएँ।



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