खबरी गुल्लक: आलोक दुबे ने दिलाया ध्यान..कलेक्टर ने लिया संज्ञान..! निजी स्कूलों की लूट की जांच के लिए डीईओ ने किया टीम गठन, दिन दिन में होगी जांच..

खबरी गुल्लक: आलोक दुबे ने दिलाया ध्यान..कलेक्टर ने लिया संज्ञान..! निजी स्कूलों की लूट की जांच के लिए डीईओ ने किया टीम गठन, दिन दिन में होगी जांच..

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अंबिकापुर ।। खबरी गुल्लक ।। 

शहर के वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे द्वारा निजी स्कूलों के खिलाफ कमीशनखोरी के लिए निजी प्रशासकों के महंगे किताब खरीदने अभिभावकों को मजबूर करने संबंधी आरोप लगा सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत को ज्ञापन सौंपा गया है। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते डीईओ को जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा के द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। 

शिकायत के अनुसार, शासन द्वारा विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं, तथापि जिले के कई अंग्रेजी माध्यम निजी शैक्षणिक संस्थान पुस्तक प्रकाशकों और कुछ किताब विक्रेता दुकानों के साथ सांठ-गांठ कर अभिभावकों और विद्यार्थियों को विशेष चिन्हित दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। शिकायत में यह भी आरोप है कि इन दुकानों से खरीद करने पर विद्यालयों/प्रकाशकों से कमीशन की व्यवस्था है, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है और सरकारी मुफ्त वितरण व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

जांच दल में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य एल.पी. गुप्ता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खलिबा के प्राचार्य श्रीमती मीना पुरोहित तथा समग्र शिक्षा प्राथमिक के ए.पी.सी.  संजय सिह शामिल हैं। 

             ज्ञापन में यह है मांग 

 वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि  सरगुजा जिले में सी.जी. बोर्ड से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी निजी शिक्षण संस्थाएं कक्षा पहली से कक्षा दसवीं तक संचालित होती है। इसमें हमारी सरकार द्वारा निःशुल्क किताब वितरण की व्यवस्था की गई है।  पुस्तक सरकारी डिपों में आ भी रही है। इसके बावजूद भी जिले के अधिकांश अंग्रेजी माध्यम की निजी शिक्षण संस्थाएं पुस्तकों के प्रकाशक और किताब दुकानों से कमीशन की सांठ-गांठ कर बच्चों एवं अभिभावकों को व्हाट्स अप के माध्यम से प्राईवेट प्रकाशकों की पुस्तकों की सूची भेजकर सेटिंग वाली दुकानों से लेने को मजबूर कर रहे है, जबकि सरकार का निर्देश है कि, इन निजी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षण संस्थाओं को निःशुल्क पुस्तक से ही बच्चों को अध्यापन कार्य करवाना चाहिए। इससे बच्चों एवं अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने ज्ञापन में उदाहरण देते हुए बताया कि कक्षा 1 ली की अंग्रेजी माध्यम की किताबें किताब दुकानों से लगभग 2000 रु. में आ रही है। इसी प्रकार 5वीं कक्षा की किताब 5000-रु. में बच्चे एवं अभिभावक खरीद रहे हैं। जबकि यह सभी किताबें छत्तीसगढ़ की सरकार निःशुल्क वितरण कर रही है।

यह भी मांग की गई है कि जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा से उन विद्यालयों का नाम मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाये कि किन स्कूलों में निःशुल्क किताब वितरण की व्यवस्था है। बच्चों के अभिभावकों से यह लगातार शिकायत मिल रही है कि, सरकार के निःशुल्क किताब को न पढ़ाकर प्राइवेट दुकानों से अभिभावक व बच्चों को मंहगे दर पर पुस्तक खरीदने हेतु बाध्य कर रहे हैं। और अभिभावकों के मोबाईल पर व्हाट्स अप के माध्यम से किताबों की सूची प्रेषित कर रहे हैं।

इस बात पुष्टि जिला प्रशासन की टीम एवं जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा के द्वारा बच्चों एवं अभिभावकों से चर्चा कर किताब दुकानों के सामने बच्चों एवं अभिभावकों से पूछताछ करके मोबाईल के व्हाट्स अप की जांच कर  की जा सकती है।

आलोक दुबे ने मांग की है कि तत्काल जिला प्रशासन के अधिकारियों की जांच टीम एवं जिला शिक्षा अधिकारियों की जांच टीम गठित कर इसकी जांच करायें ताकि हमारी सरकार की महती निःशुल्क किताब वितरण के योजना का लाभ सरगुजा जिले के छात्रों को मिल सके।

अभिभावक इसलिए नहीं आते सामने

इस तरह की शिकायतों के लिए अभिभावक इसलिए सामने नहीं आ पाते हैं कि उनके बच्चे संबंधित स्कूलों में पढ़ रहे होते हैं। अभिभावकों में यह भय बना रहता है कि कहीं स्कूल प्रबंधन इसका बदला बच्चों से न ले। यह भय स्वाभाविक है।


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