अंबिकापुर।खबरी गुल्लक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने भाजपा द्वारा पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान सांसद धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान समारोह देश के लाखों छात्रों और युवाओं की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में लगातार बढ़ती अव्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर संकट देखे हैं। इन घटनाओं ने लाखों युवाओं का विश्वास डगमगाया है। ऐसे समय में पूर्व शिक्षा मंत्री का सम्मान किया जाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के दौरान पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर छात्रों से माफ़ी मांगने के बजाय उन्हें ही गुमराह होने का आरोप लगाया। इसके बाद भाजपा के कई केंद्रीय मंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी प्रशंसा करना यह दर्शाता है कि सरकार छात्रों की पीड़ा को समझने के बजाय अपनी राजनीतिक छवि बचाने में अधिक रुचि रखती है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अनेक युवा मानसिक तनाव और निराशा से गुज़रे। पेपर लीक की घटनाओं के बाद जिन छात्रों ने कथित रूप से निराशा में अपनी जान गंवाई, उनकी नैतिक जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? क्या सरकार और तत्कालीन शिक्षा मंत्रालय इस सवाल से बच सकते हैं? देश का युवा इसका जवाब चाहता है। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि यदि पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, पैलेट गन के इस्तेमाल तथा बिहार में छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता जैसी घटनाओं के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल सफल माना जा रहा है, तो भाजपा देश को बताए कि आखिर यह सम्मान किस उपलब्धि के लिए दिया जा रहा है? और यदि उनका कार्यकाल सफल नहीं था, तो फिर इस प्रकार का सार्वजनिक सम्मान किस उद्देश्य से किया जा रहा है?
परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या अब शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं, पेपर लीक और छात्रों के साथ हुए अन्याय पर जवाबदेही तय करने के बजाय सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। यदि ऐसा है, तो यह देश के युवाओं के संघर्ष, उनके सपनों और उनके भविष्य का अपमान है। उन्होंने कहा कि देश का युवा केवल भाषण नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और न्याय चाहता है। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना और छात्रों की आवाज़ का सम्मान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में जनता के सवालों से बचा नहीं जा सकता।




