आयुष्मान योजना से आत्मा का होता रहा इलाज ..! मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में मरीज की चार दिन हुई मौत.. 42 दिनों बाद मृतक के मोबाइल पर संदेश भेजा आप स्वस्थ हैं आज आप घर जा रहे हैं...

आयुष्मान योजना से आत्मा का होता रहा इलाज ..! मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में मरीज की चार दिन हुई मौत.. 42 दिनों बाद मृतक के मोबाइल पर संदेश भेजा आप स्वस्थ हैं आज आप घर जा रहे हैं...

khabrigullak.com
By -
0

अंबिकापुर। खबरी गुल्लक 

शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में हुई एक गंभीर अनियमितता खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग व आयुष्मान भारत योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। जशपुर जिले के कटंगखार के आरक्षक देवनारायण राम का चिकित्सा रिकॉर्ड, अस्पताल तथा आयुष्मान के संदेशों में विरोधाभास सामने आया है। अस्पताल ने मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र 30 जून को जारी किया था, जबकि आयुष्मान रिकॉर्ड में उन्हें 42 दिनों तक भर्ती और इलाज दिखाया गया है। इस बीच मृतक के मोबाइल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से संदेश भी आया  प्रिय देवनारायण राम, हमें खुशी है कि आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। यह संदेश मृतक के परिजनों के लिए बुरी तरह से मानसिक आघात बनकर उभरा।देव नारायण राम की पत्नी सीमा कुजूर इसी मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं उन्होंने आरोप लगाया है कि उनका पति केवल चार दिनों के भीतर इलाज के दौरान की मौत हुई थी। सीमा ने बताया कि वास्तविक मौत के तुरंत बाद अस्पताल ने मृत्यु प्रमाणपत्र प्रदान कर दिया था। फिर भी आयुष्मान योजना के दस्तावेजों में देवनारायण को 42 दिन तक भर्ती दिखाया गया  इससे स्पष्ट होता है कि या तो रिकॉर्ड में मनमाना बदलाव किया गया या योजना का दुरुपयोग किया गया। सीमा ने कहा हमारे साथ संवेदनहीनता की यह सबसे बड़ी मिसाल है  पहले पति की मौत, फिर उनके मोबाइल पर आप स्वस्थ हैं का संदेश। क्या यह सब आयुष्मान के फंड के दुरुपयोग या फर्जीवाड़े के लिए किया गया? मैं चाहती हूं कि इस मामले की निष्पक्ष और तेज़ जांच हो और जो भी दोषी हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई हो। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि यह मामला संज्ञान में आया है और अधीक्षक ने जांच टीम गठित कर दी है। डीन, मेडिकल कॉलेज डॉ. अविनाश मेश्राम ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कैसे 42 दिनों तक कागजों में भर्ती दिखाया गया और मृतक के मोबाइल पर संदेश कैसे भेजा गया इन बिंदुओं की विस्तृत जांच की जाएगी।

आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में दिख रही गड़बड़ी और मृतक को भेजा गया गलत संदेश दोनों ही बातें सरकारी स्वास्थ्य बीमा प्रणालियों में संभावित जोख़िम और भ्रष्टाचार की चेतावनी हैं। ऐसे मामले न सिर्फ़ योजना की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाते हैं, बल्कि परिवारों को मानसिक आघात व आर्थिक असुरक्षा का सामना भी कराते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह फर्जीवाड़ा सिद्ध हुआ तो आयुष्मान जैसी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त प्रक्रियात्मक सुधार व ऑडिट आवश्यक है।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)