आईजी दीपक कुमार झा के नेतृत्व में सरगुजा रेंज में दोषमुक्ति प्रकरणों की रेंज-स्तरीय हुई समीक्षा.. 62 प्रकरणों में दोषसिद्धि पर विवेचकों को मिली शाबाशी

आईजी दीपक कुमार झा के नेतृत्व में सरगुजा रेंज में दोषमुक्ति प्रकरणों की रेंज-स्तरीय हुई समीक्षा.. 62 प्रकरणों में दोषसिद्धि पर विवेचकों को मिली शाबाशी

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अंबिकापुर। खबरी गुल्लक 

 पुलिस महानिरीक्षक  सरगुजा रेंज  दीपक कुमार झा की अध्यक्षता में रेंज स्तरीय दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, अंबिकापुर में आयोजित की गई। बैठक में माह मई और जून के सेशन कोर्ट व लेबर कोर्ट के कुल 578 दोषमुक्ति प्रकरणों की विस्तृत पड़ताल की गई और न्यायिक निर्णयों व विवेचना संबंधी कमियों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में रेंज आईजी ने कहा कि जिलेवार इकाई स्तर पर प्रत्येक माह मंगलवार को होने वाली बैठक में लंबित प्रकरणों की बारीक व बिंदुवार समीक्षा अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि दोषमुक्ति के कारणों व विवेचना में पाई गई त्रुटियों को साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट रूप से जाँचा और कोर्ट में प्रस्तुत किया जाए, जिससे दोषसिद्धि के आंकड़ों में वृद्धि हो सके। E-prosecution व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अभियोग पत्रों (चार्जशीट) को जिला अभियोजन अधिकारी को पर्याप्त समय पूर्व भेजा जाए ताकि उनमें पाई जाने वाली कमी व त्रुटियों को समय रहते ठीक किया जा सके। इससे न्यायालय में विचारण के दौरान किसी भी कमी का लाभ आरोपी को नहीं मिल सकेगा और दोषसिद्धि की सम्भावना बढ़ेगी। बैठक में यह भी बताया गया कि  न्यायालय ने माह मई व जून के सेशन में 62 प्रकरणों में दोषसिद्धि की पुष्टि की है। इन दोषसिद्ध प्रकरणों का प्रकार इस प्रकार है: हत्या 18, हत्या के प्रयास 12, बलात्कार 8, एससी/एसटी एक्ट से जुड़े 11, पोक्सो एक्ट 4, एनडीपीएस एक्ट 7 और भ्रष्टाचार/ठगी 2 प्रकरण। रेंज आईजी ने इन सफल अभियोग प्रस्तुतियों पर संबंधित जिले के अधिकारियों की सराहना की।

रेंज आईजी ने कहा कि किसी भी प्रकरण में शुरुआत से ही साक्ष्यों का सूक्ष्म संकलन और केश डायरी में भौतिक साक्ष्यों तथा गवाहों के कथनों का सटीक उल्लेख आवश्यक है। विशेषकर बलात्कार व पोक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में लोक अभियोजक द्वारा पीड़िता के न्यायालयीन 164 क्रिमिनल कोर्ट कथन (धारा-183 बीएनएसएस) को Exhibit के रूप में विचारण के दौरान अनिवार्य कराना चाहिए। यदि बाद में पीड़िता पक्षद्रोही कथन करती है तो उसके विरूद्ध धारा-344 दप्रसं. (धारा-383 बीएनएसएस) के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में जहाँ प्रारम्भिक विवेचना के दौरान आवेदनकर्ता/याचक द्वारा झूठा या मिथ्या बयानी किया गया पाया जाता है, उन प्रकरणों के संबंध में खारिजी स्वीकृति हेतु हर सम्भव प्रयास किया जाए और खारिजी स्वीकृति के पश्चात् न्यायालय में धारा-182, 211 भादसं. (थारा 217, 248 बीएनएस) के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

फोरेंसिक-साक्ष्य और एनडीपीएस मामलों पर मार्गदर्शन

रेंज आईजी ने निर्देश दिया कि सात वर्ष से अधिक दंडनीय सजा वाले मामलों में घटना स्थल पर उपलब्ध भौतिक व परिस्थिति-जन्य साक्ष्यों के संकलन हेतु एफएसएल अधिकारियों की मौजूदगी में घटनास्थल निरीक्षण कराया जाए तथा संबंधित रिपोर्ट तात्कालिक रूप से न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। इससे जाँच की गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रकरणों में दोषसिद्धि की संभावनाएँ बढ़ेंगी। एनडीपीएस एक्ट के संबंध में रेंज आईजी ने चिंता जताई कि कई मामलों में अन्वेषण/विवेचना अधिकारी आदेशात्मक प्रावधानों का सही पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एनडीपीएस की विवेचना में सुधार हेतु इकाई स्तर पर समय-समय पर विवेचकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किए जाएँ ताकि प्रक्रिया संबंधी त्रुटियाँ न हों।

बैठक में यह हुए शामिल

दोषमुक्ति समीक्षा बैठक में उमनि/वरि. पुलिस अधीक्षक सरगुजा  राजेश अग्रवाल, जशपुर  लाल उमेद सिंह, पुलिस अधीक्षक कोरिया  हरिश राठर, बलरामपुर  वैभव बैंकर, एमसीबी श्रीमती रत्ना सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन सहित संभाग के लोक अभियोजन अधिकारी एवं कार्यालय के रीडर उपस्थित थे। रेंज आईजी ने समापन में सभी जिलों के पुलिस विभाग से कहा कि वे विवेचना एवं अभियोजन की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें और नियमित समीक्षा जारी रखें ताकि विधि व्यवस्था व न्याय दिलाने में सफलता सुनिश्चित हो सके।


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