अंबिकापुर।खबरी गुल्लक
देश के पारंपरिक सराफा व्यापारियों एवं स्वर्ण कारीगरों ने बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूमों द्वारा चलाए जा रहे भ्रामक विज्ञापन और आकर्षक प्रलोभनों के खिलाफ केंद्र सरकार व स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आग्रह किया गया है कि पूरे भारतवर्ष में इस विषय पर समान एवं प्रभावी कानूनी ढांचा बनाकर पारंपरिक व्यापारियों व कारीगरों की प्रतिष्ठा और आर्थिक हितों की रक्षा की जाए।ज्ञापन बिलासपुर जिले के तमाम सराफा व्यापारियों और सराफा एसोसिएशनों की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार तथा माध्यम से कलेक्टर, जिला अंबिकापुर को भेजा गया है। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में सराफा एसोसिएशन सरगुजा संभाग के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश सोनी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर अजीत वसंत को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया है कि पारंपरिक सराफा व्यवसाय केवल व्यापारिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध हस्तकला, सांस्कृतिक विरासत तथा स्थानीय रोजगार का स्त्रोत है। हजारों छोटे मध्यम सराफा ठेले व दुकानदार और लाखों कलाकारी से जुड़े स्वर्ण कारीगर पीढ़ियों से इस व्यवसाय पर निर्भर हैं। सराफा व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम अतिशयोक्तिपूर्ण विज्ञापन, छूट-लुभावने ऑफर और नकली प्रमाणपत्र के सहारे आम उपभोक्ताओं को भ्रामक जानकारी देते हैं। ऐसी प्रवृत्तियों के कारण पारंपरिक दुकानों का ग्राहक वहन घट रहा है, जिससे छोटे व्यापारियों की बिक्री पर सीधा प्रभाव पड़ा है। कई मामलों में उपभोक्ता भ्रमित होकर महंगे डिज़ाइन या प्रोसेसिंग फी पर अधिक भुगतान कर देते हैं, जबकि पारंपरिक शिल्प में सटीक वजन, शुद्धता व कारीगरी का अलग स्तर होता है। स्थानीय कारीगरों की आय व रोज़गार अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, जिससे हस्तशिल्प व पारंपरिक ज्ञान धीरे-धीरे लुप्त होने का खतरा है। पूरे देश में समान और प्रभावी कानूनी व्यवस्था बड़े-बड़े ब्रांड्स के विपणन व विज्ञापन पर नियमन के लिए नीतिगत निर्देश व कड़े मानक लागू किए जाएँ, भ्रामक विज्ञापनों तथा गलत दावों की जांच व दंडन हेतु विशेष निगरानी प्राधिकरण या सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएँ, पारंपरिक सराफा व्यापारियों और स्वर्ण कारीगरों के हितों की सुरक्षा हेतु विशेष आर्थिक और तकनीकी सहायता, कौशल संवर्धन व विपणन मार्गदर्शन की व्यवस्था। स्थानीय स्तर पर सत्यापित पारंपरिक शिल्प जैसे पहचान अंकन और प्रमाणीकरण प्रणाली की स्थापना, ताकि उपभोक्ता और निर्माता के बीच पारदर्शिता बनी रहे। उपभोक्ता जागरूकता अभियानों के माध्यम से खरीदारों को सही जानकारी तथा वजन, करंट शुद्धता व प्रमाणपत्र की जांच के प्रति संवेदनशील किया जाए।
ज्ञापन के संलग्न बयानों में स्थानीय सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पारंपरिक सराफा व्यवसायों की प्रतिष्ठा और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि "वोकल फॉर लोकल" और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल पाएगा जब स्थानीय कारीगरों एवं दुकानदारों को संरक्षित किया जाएगा तथा बाज़ार में उन्हें समान अवसर और पारदर्शिता मिलेगी।
वाणिज्य एवं उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वेलरी क्षेत्र में मानकीकरण और विज्ञापन नियमों की कड़ाई से निगरानी आवश्यक है। वे सुझाव देते हैं कि सरकार आरबीआइ व उपभोक्ता संरक्षण विभाग सहित संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर एक समेकित नीति बनाए, जिसमें प्रमाणन, विज्ञापन मानक, दावों की सत्यापन प्रक्रिया और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र स्पष्ट हों। स्थानीय नागरिक समाज व उपभोक्ता संगठन भी इस मुद्दे पर चिंतित दिखे। उनके अनुसार, उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ ऐसे ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा सही तरीक़े से सुनिश्चित करने हेतु छोटे व्यापारियों को बाजार में टिकने के साधन और प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
व्यापारियों ने कहा है कि अगर उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे की रणनीति के रूप में राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर पर संगठित विरोध, जनजागरण और आवश्यक कानूनी कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं।स्थानीय सराफा व्यापारियों व कारीगरों की यह गुहार यह याद दिलाती है कि आर्थिक नीतियाँ और उपभोक्ता सुरक्षा के नियम तब ही सफल होंगे जब वे छोटे और पारंपरिक व्यवसायों को समर्थन दें। इस मामले में सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम से ही तय होगा कि पारंपरिक कला-व्यवसाय और स्थानीय अर्थव्यवस्था कितनी मजबूती से स्थित रह पाएँगे।
यह है प्रमुख मांगें
स्वर्ण आभूषणों की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र जांच व्यवस्था, भ्रामक विज्ञापनों सस्ता सोना,जीरो मेकिंग चार्ज आदि जैसे झूठी प्रचार प्रसार पर सख्त रोक एवं उस पर अपराधिक कानून बनें, पूरे देश के लिए समान और पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था, हमारे स्थानीय परंपरागत स्वर्ण कारीगरों के संरक्षण हेतु स्वर्ण कला कल्याण बोर्ड का गठन, सर्राफा व्यापार से जुड़े कानूनी प्रावधानों का सरलीकरण, स्थानीय सर्राफा व्यापारी वर्षों से विश्वास और पारदर्शिता के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हम सरकार से अपील करते हैं कि इस विषय पर सकारात्मक कदम उठाए जाएं ताकि हमारे पुश्तैनी व्यापार और कारीगरों की आजीविका सुरक्षित रहे।
प्रतिनिधिमंडल में यह रहे शामिल
राजेश सोनी का.अध्यक्ष सरगुजा संभाग छत्तीसगढ़ सर्राफा एसोसिएशन, निलेश सोनी जिला प्रभारी, अंबिकापुर सर्राफा एसोसिएशन से राजेश सोनी, संजय सोनी, नवनीत पिंटू सोनी, दीपक सोनी, धनंजय सोनी, दिनेश सोनी, नीरज सोनी , संजय सोनी , काका खरात आदि मौजूद रहे।




