अंबिकापुर। खबरी गुल्लक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने शिक्षा सत्र के बीच करीब 700 शिक्षकों के एकमुश्त स्थानांतरण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों का तबादला करना सरकार की स्थानांतरण नीति, प्रशासनिक पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूल पहले से ही शिक्षकों की कमी और अनेक शैक्षणिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में एक साथ करीब 700 शिक्षकों का स्थानांतरण विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालयों की व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी अपरिहार्य प्रशासनिक परिस्थिति पैदा हुई, जिसके कारण शिक्षा सत्र के बीच यह बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि 700 शिक्षकों के चयन का आधार क्या था? लगभग 400 शिक्षक अभी भी प्रतीक्षा सूची में क्यों हैं? क्या सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर दिया गया? यदि स्थानांतरण के लिए स्पष्ट और समान नीति थी तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
पोस्टिंग प्रक्रिया पर उठाया बड़ा सवाल
परवेज़ गांधी ने कहा कि स्थानांतरण आदेश से भी अधिक महत्वपूर्ण सवाल अब पोस्टिंग का है। सरकार को बताना चाहिए कि स्थानांतरित शिक्षकों की पदस्थापना किन नियमों के तहत होगी। क्या पोस्टिंग वरिष्ठता, विषय की आवश्यकता और विद्यालय में वास्तविक रिक्त पद के आधार पर होगी? क्या विद्यालयवार रिक्त पदों की सूची सार्वजनिक की जाएगी? क्या शिक्षक अपनी पसंद अथवा विकल्प दे सकेंगे? क्या पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी। उन्होंने कहा कि यदि पोस्टिंग के स्पष्ट एवं बाध्यकारी मापदंड सार्वजनिक नहीं किए गए तो मनमानी, पक्षपात और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को बल मिलेगा। सरगुजा मैनपाट के शिक्षक को बकायादा गरियाबंद का जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया। ट्रांसफर आदेश पर सवाल उठाता है।
डबल इंजन में कहीं डबल वसूली का इंजन तो नहीं चल रहा
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षकों के बीच स्थानांतरण और पोस्टिंग को लेकर आर्थिक लेन-देन की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा, “डबल इंजन की भाजपा सरकार में कहीं डबल वसूली का इंजन तो नहीं चल रहा? उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी घोटाले को बिना जांच के प्रमाणित कहना उचित नहीं है, लेकिन जिस प्रकार प्रक्रिया को लेकर सवाल और चर्चाएं सामने आ रही हैं, उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सरकार को आरोपों को खारिज करने के बजाय दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
परवेज़ गांधी ने मांग की कि सरकार स्थानांतरण के मापदंड, स्थानांतरित शिक्षकों की सूची, विद्यालयवार वास्तविक रिक्त पद, पोस्टिंग संबंधी दिशा-निर्देश, अनुमोदन एवं निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करे। साथ ही पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर आर्थिक लेन-देन, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता चाहिए, ट्रांसफर उद्योग नहीं। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षकों को निष्पक्ष प्रशासन और प्रदेश की जनता को जवाबदेह शासन चाहिए।




