29 वर्ष बाद भी झोपड़ी में स्कूल: नरकट के 17 बच्चों के लिए पक्के भवन की मांग,सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने सौंपा ज्ञापन

29 वर्ष बाद भी झोपड़ी में स्कूल: नरकट के 17 बच्चों के लिए पक्के भवन की मांग,सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने सौंपा ज्ञापन

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अंबिकापुर। खबरी गुल्लक।

सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत करमहा के शासकीय प्राथमिक शाला नरकट में लगभग 29 वर्ष बीत जाने के बाद भी पक्का स्कूल भवन नहीं बन पाया है। वर्तमान में विद्यालय घास-फूस और बांस से बनी झोपड़ी में संचालित हो रहा है, जहां लगभग 17 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।1997 में स्थापित इस विद्यालय में बच्चे आज भी अस्थायी झोपड़ीनुमा संरचना में कक्षाएं कर रहे हैं। बरसात में छत से पानी टपकने, गर्मी में भीषण गर्मी और ठंड में कड़ाके की ठंड से बच्चों को परेशानी हो रही है। झोपड़ी की जर्जर और असुरक्षित स्थिति के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा, नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चों में माझी-मझवार समाज सहित अन्य ग्रामीण परिवारों के बच्चे शामिल हैं। विद्यालय की इस बदहाल स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर अंबिकापुर को आवेदन सौंपकर स्कूल के लिए नवीन पक्के भवन के निर्माण की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए पहाड़ी और कच्चे रास्तों की कठिनाई है, ऐसे में सुरक्षित भवन बेहद आवश्यक है। आवेदनकर्ता ने मांग की है कि संबंधित विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण कराकर विद्यालय के लिए नए पक्के भवन की स्वीकृति प्राथमिकता के आधार पर दी जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि स्कूल भवन की समस्या की जानकारी अधिकारियों को पहले से दी जाती रही है और भवन स्वीकृत होने की बात बताई गई है; बरसात के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। दूसरी ओर जिले में भवनविहीन शासकीय स्कूलों की समस्या व्यापक है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरगुजा में 26 स्कूल अब भी भवनविहीन हैं, जिनमें नरकट की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है।

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक स्कूल में पक्का भवन नहीं बनता, बच्चों को मौसम की मार और असुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करनी पड़ेगी। उन्होंने प्रशासन से निर्माण प्रक्रिया को शीघ्र धरातल पर उतारने की मांग की है।

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