समय पर भवन बना नही सौंपे जाने पर महिला को भतीजे की शादी होटल में करनी पड़ी, क्षुब्ध महिला के परिवाद पर जिला उपभोक्ता आयोग ने ठेकेदार पर ठोका एक लाख रुपए जुर्माना, 3000 का वाद व्यय भी देगा..., जाने क्या है मामला, पढ़ें पूरी खबर......

समय पर भवन बना नही सौंपे जाने पर महिला को भतीजे की शादी होटल में करनी पड़ी, क्षुब्ध महिला के परिवाद पर जिला उपभोक्ता आयोग ने ठेकेदार पर ठोका एक लाख रुपए जुर्माना, 3000 का वाद व्यय भी देगा..., जाने क्या है मामला, पढ़ें पूरी खबर......

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  अंबिकापुर। अनुबंध शर्तो के तहत तय समय में भवन का निर्माण कर नही सौंपना  एक ठेकेदार को महंगा पड़ गया। निर्माण कराने वाली महिला को जब भतीजे की शादी के लिए होटल बुक करना पड़ा तब उन्होंने  ठेकेदार के खिलाफ आर्थिक व मानसिक क्षति का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग  में परिवाद दायर कर दी और आयोग के द्वारा मामले की सुनवाई करते हुए न सिर्फ ठेकेदार पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया बल्कि वाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपए पीड़िता को प्रदान करने का फैसला सुनाया है। यह प्रकरण आने पर जिला उपभोक्ता आयोग


के द्वारा उक्त फैसला दिया गया। बताया जा रहा है कि मनेंद्रगढ़ निवासी पार्वती नामक एक महिला के द्वारा ग्लोबल सिटी में आवासीय कालोनी बनवाने हेतु मंगला चौक निवासी अरुण नामक ठेकेदार के साथ सौदा किया गया था। यह करार 12 सितंबर 2019 को हुआ था। जिसके तहत तय समय में ठेकेदार द्वारा भवन बनाकर महिला को सौंपा जाना था। मगर ठेकेदार द्वारा समय पर न तो भवन का निर्माण कराया जा सका  और न ही सौंपा जा सका। भवन पूर्ण नहीं होने के कारण महिला को अपने भतीजे की शादी के लिए एक होटल में किराए पर भवन लेना पड़ा था, जिससे क्षुब्ध होकर पीड़ित महिला के द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया गया था। बताया जा रहा है कि सुनवाई के दौरान आयोग के द्वारा दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन ठेकेदार ने इस नोटिस का कोई जवाब नही दिया। बार - बार जवाब प्रस्तुत करने का अवसर देने के बाद भी जब ठेकेदार उपस्थित नही हुआ तो उपभोक्ता आयोग ने एक पक्षीय कार्यवाई करते हुए फैसला सुनाया,जिसमें 45 दिन के भीतर अनुबंध के तहत निर्माण पूर्ण कर पीड़िता को सौंपने, निर्माण में शेष राशि का हिसाब कर निर्माणकर्ता को देने।और समय पर भवन पूर्ण नहीं होने पर पीड़िता के मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में एक हजार रुपए तथा 3000 रुपए का वाद व्यय राशि भी ठेकेदार को देने फैसला सुनाया।


 

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