अंबिकापुर। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर की पहचान देश भर में स्वच्छ शहर के रूप में बन रही है। अभी तक देश के कई राज्यों की टीम यहां के स्वच्छता मॉडल का अध्ययन करने आ चुकी हैं। स्वच्छता दीदियों की मेहनत, निगम, जिला प्रशासन, जनप्रतिनियों के साथ आमनागरिकों की पहल से माई अंबिकापुर की ख्याति लगातार बढ़ रही है, इसी संयुक्त प्रयास से शहर को अभी तक राष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार मिल चुके हैं,.... मगर बड़े आयोजनों, राजनैतिक और गैर राजनैतिक कार्यक्रमों में शहर के इस गरिमा के विपरीत डिस्पोजल, प्लास्टिक के पानी बोतल सहित अन्य कचरा फैलाने में भी कोई कसर नही छोड़ी जा रही है... ऐसी स्थिति केवल राजनैतिक, निजी कार्यक्रमों में नही बल्कि शासकीय कार्यक्रमों में भी देखने को मिल रही है। दो दिनों पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री की उपस्तिथि में पीजी कॉलेज के हाकी मैदान में आयोजित एक शासकीय कार्यक्रम में ऐसा ही नजारा था। भीषण गर्मी में लोग गला तर करने पानी गटकने के बाद खाली बोतल बैठकदीर्घा में ही फेंक रहे थे। यह तस्वीर... अंबिकापुर के ख्याति के विपरीत थी। ऐसी तस्वीर से लोगों के मन में शहर की कैसी छवि बनी होगी इसे आसानी से समझा जा सकता है। ....नागरिकों का कहना है कि यदि आयोजनकर्ता इन बातों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल के बैठकदीर्घा में डस्टबीन रखवाने के लिए पहल करें और प्लास्टिक कचरा पर अंकुश लगा पाए तो दूसरों के लिए उदाहरण भी बन सकते हैं।
दीदी बर्तन बैंक को क्यों भुल रहे नगर निगम के द्वारा प्लास्टिक कचरा पर रोक लगाने, कमी लाने के लिए दीदी बर्तन बैंक की योजना बनाई गई है। जिसका संचालन महिला समूह के माध्यम से हो रहा है। इस बैंक का उद्देश्य लोगों को कार्यक्रमों के लिए सस्ते दर पर स्टील के गिलास सहित अन्य बर्तन, सामग्री उपलब्ध कराना है, ताकि डिस्पोजल, प्लास्टिक के सामानों का उपयोग कम हो सके। मगर इसका पालन शासकीय कार्यक्रमों में ही नही हो पा रहा है तो दूसरे निजी कार्यक्रमों में कैसे होगा यह भी आसानी से समझा जा सकता है।
तो बनती अलग छवि
नागरिकों का कहना है कि यदि पीजी कालेज के हाकी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को स्टील के गिलास में पानी पिलाते हुए डिस्पोजल, प्लास्टिक बोतल का कचरा रोक पाते तो शहर की छवि गरिमा के अनुरूप बनती। बड़े शासकीय व निजी आयोजनों में इसका पालन कैसे हो इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जबतक हम खुद उदाहरण नही बनेंगे ... दूसरों से इसका पालन कैसे करा पाएंगे । इसलिए पहल हमें खुद से करनी होगी....।




