श्रद्धालुओं ने विभिन्न शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग के साथ भारत की आत्मा अयोध्या में पूजन.. दर्शन कर समाज और देश में खुशहाली की कामना की..... वापस लौटने के बाद तीर्थयात्री संतोष श्रीवास ने यात्रा के अनुभवों को शब्दों में पिरोते हुए कहा इन धामों से लौटने का मन नहीं करता... काशी में ही जीवन का सार है.....

श्रद्धालुओं ने विभिन्न शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग के साथ भारत की आत्मा अयोध्या में पूजन.. दर्शन कर समाज और देश में खुशहाली की कामना की..... वापस लौटने के बाद तीर्थयात्री संतोष श्रीवास ने यात्रा के अनुभवों को शब्दों में पिरोते हुए कहा इन धामों से लौटने का मन नहीं करता... काशी में ही जीवन का सार है.....

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अंबिकापुर। न्यायधानी  बिलासपुर के श्रद्धालुओं के जत्थे ने विभिन्न धार्मिक स्थलों का दर्शन और पूजा अर्चना करते हुएपरिवार और देश में खुशहाली की कामना की। यह यात्रा बिलासपुर से  आरंभ हुई जो मां महामाया नगरी अंबिकापुर और उसके बाद विभिन्न शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग के साथ भारत की आत्मा अयोध्या में पूजन दर्शन कर समाज और देश में खुशहाली की कामना की। खबरी गुल्लक डॉट कॉम के विशेष संवाददाता और श्रीवास समाज के पदाधिकारी संतोष श्रीवास के द्वारा इस धार्मिक यात्रा से लौटने के बाद अनुभवों को शब्दों में पिरोते हुए बताया गया कि  हमारी यात्रा बिलासपुर से शुरू हुई और अंबिकापुर में मां महामाया का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद  सुबह-सुबह काशी पहुंचे ।  यह पावन नगरी कितनी पुरानी और धार्मिक है जिसकी कल्पना हम नहीं कर सकते है। पहले काशी फिर बनारस और फिर वाराणसी के नामो  से इसे जाना जाता है।  यह नगरी महादेव की नगरी कही जाती है। यहां ऐसा लगा मानो यही जीवन का सार है। धार्मिक स्थलों का कायाकल्प देख श्रद्धालुओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि धार्मिक स्थलों में वीआईपी टिकिट जैसा कुप्रबंधन नही होना चाहिए, व्यवस्था ऐसी हो जिसमें सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन व पूजा का अवसर मिल सके।

धरती का स्वर्ग है अयोध्या

रिमझिम रिमझिम बारिश के बीच सरयू मां,बड़े हनुमान, दशरथ महल, कनक भवन , हनुमानगढ़ी , दशरथमहल , श्रीलक्ष्मणकिला , कालेराम मन्दिर , मणिपर्वत , श्रीराम की पैड़ी , नागेश्वरनाथ , क्षीरेश्वरनाथ श्अनादि पञ्चमुखी महादेव मन्दिर , गुप्तार घाट समेत अनेक मन्दिर यहाँ प्रमुख दर्शनीय स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं, इन सब धार्मिक स्थलों में भी दर्शन किया।

 ताजमहल के दीदार में अव्यवस्था पर रोष ने रुलाया

यात्रा के दौरान  ताजमहल का दीदार करने आगरा में रुके। आगरा में दोपहर 12 बजे दीदार करने पहुंचे। यहां दो तरह के टिकट से लोगो में काफी नाराजगी दिखी। 50 रुपए के शुल्क पर आप बाहर से दीदार कर सकते है,,,अंदर में गर्भ गृह में जाकर देखने पर करीब 300 का टिकट अलग लेना पड़ेगा। यहां पर पीने का पानी और प्रसाधन की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। पीने के पानी के लिए मारामारी हो रही थी। लोगो का कहना है कि शुल्क लीजिए पर सुविधाएं जरूर दे। 

 मथुरा वृंदावन ने किया मंत्रमुग्ध

कृष्ण जी के जन्म स्थली मथुरा में मन मंत्र मुग्ध हो गया।   श्री रंगनाथ मंदिर में भगवान नरसिंह, वेणुगोपाल और रामानुजाचार्य के साथ राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को भी प्रदर्शित किया गया है। बहुत बड़े एरिया में चारो ओर बड़े बड़े मंदिर बीच में सीने का खंभा होने के कारण खंभा वाला मंदिर भी कहलाता है।  

वृंदावन में तीन बातों का  ध्यान जरुरी

.मोबाइल, टोपी, चस्मा का न इस्तेमाल करे। बंदरो का आतंक इतना है को कब चुरांगे आपको पता ही नही चलेगा। बाके बिहारी मंदिर में यदि आपके साथ बच्चे और महिलाएं है तो न जाए यही बेहतर होगा। मंदिर के गर्भ गृह के सामने बरामदे में इतने लोगो को एक साथ भेज दिया जाता है,,जिससे चोरी, और जान जाने का खतरा बना रहता है, धक्का मुक्की इतना अधिक होता है की सामान्य लोग दर्शन तो छोड़ अपनी जान बचाने में लगे रहते है। 

मोक्ष प्राप्ति के लिए संगम स्नान

तीर्थ राज प्रयागराज में शाम हो चला था सो सभी लोग उस दिन पंडा के यहां आराम किए। दूसरे दिन सुबह कुछ लोग नाव से कुछ लोग ऑटो करके सीधे संगम पहुंचे। घंटो संगम में डुबकी लगाने के बाद लेटे हुए हनुमान  मंदिर, जहां साफ सफाई और यहां विराजित मूर्तियों को देखते ही बनता है, यहां पर लक्ष्मी माता, विष्णु जी, दुर्गा माता, राम सीता और राधे कृष्ण के अलावे खाटू श्याम, गणेश जी, हनुमान मंदिर भी काफी आकर्षक और भव्य है। 

51शक्तिपीठों में प्रधान है मां विंध्यवासिनी

तीर्थ यात्रा के अंतिम पड़ाव शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी के द्वार। शाम के समय दर्शन जल्दी मिल गया। यहां भी पण्डो का आतंक है, पैसे देने पर मंदिर के गर्भ गृह में सीधे भेज देते है, गर्भ गृह में जो पंडे रहते हैं आपके हाथों से चढ़ावे के ले जाने वाले पैसों को छीन लेते है। इनसे थोड़ा बच के रहे। अभी मंदिर का जीर्णोधार हो रहा है। 




यात्रा में यह रहे शामिल 

इस यात्रा में आयोजन करता ननकु साहू एवं उनकी पत्नी श्रीमती मंजू साहू, संतोष बृहस्पति श्रीवास कोषाध्यक्ष श्रीवास समाज, श्री लक्ष्मी लक्ष्मीन श्रीवास, नरेंद्र मनोरमा श्रीवास, सीताराम श्रीवास, नारायण विनय श्रीवास, संतोष उमा श्रीवास, प्रकाश लछन श्रीवास, बिसाहुराम श्रीवास, मनोज ममता श्रीवास, सुखनंदन पुष्पा श्रीवास, रामसेवक गायत्री साहू, समारू साहू, कुंती साहू, भानु प्रताप साहू, सविता ठाकुर, इंदु सिंग ठाकुर, शिला सिंग ठाकुर, सावित्री ठाकुर, शकुंतला ठाकुर, रवि यादव, प्रकाश निर्णेजक, तिलक साहू,  ज्योति, किरण, रोशनी, मानसी, ओंकार, शिवांश, चिकी श्रीवास कोरबा, जांजगीर, मुंगेली, तखतपुर, मस्तूरी, बिलासपुर जिला सहित लगभग 40 सदस्यीय दल ने सकुशल दर्शन लाभ लिया।

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