सिर्फ दूरस्थ इलाके नही अंबिकापुर और इससे लगे गांवों में भी सर्प दंश पीड़ितों की झाड़ फूंक के चक्कर में जा रही है जान.... इस गांव में सांप ने महिला को डसा... परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाए बुला लाया बैगा... चार घंटे अंध विश्वास के खेल के बाद महिला की टूट गई सांसे.....

सिर्फ दूरस्थ इलाके नही अंबिकापुर और इससे लगे गांवों में भी सर्प दंश पीड़ितों की झाड़ फूंक के चक्कर में जा रही है जान.... इस गांव में सांप ने महिला को डसा... परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाए बुला लाया बैगा... चार घंटे अंध विश्वास के खेल के बाद महिला की टूट गई सांसे.....

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अंबिकापुर। सर्प दंश पीड़ितों की झडफुंक के चक्कर में मौत होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसी घटनाएं  न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में देखी जा रही है बल्कि संभाग मुख्यालय अंबिकापुर और इससे लगे ग्रामों में भी होने से लोगों की चिंता बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि अंबिकापुर से लगे ग्राम रनपुरकला निवासी मानकुंवर बाई पति रामबिलास गोंड 46 वर्ष 20 जुलाई की रात खाना खाने के बाद जमीन पर सोई थी। देर रात ढाई बजे विषधर ने उसे डस लिया। उसके चीखे जाने पर परिजन उठे और सांप को एक झाल की सहायता से पकड़ने के बाद पीड़िता को अस्पताल ले जाने के बजाए झाड़ फूंक करने वाले बैगा को घर पर बुला लाए। बैगा मंत्र से जहर उतारने का दावा कर रहा था और फिर लगभग चार घंटे तक घर पर अंधविश्वास का खेल चलता रहा। बैगा ने जब देखा की उसकी हालत पूरी तरह से बिगड़ चुकी है तब हाथ खड़ी करते हुए अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। इधर झाड़ फूंक के नाम पर आरंभिक महत्वपूर्ण समय गंवाने के बाद सर्प दंश पीड़िता को लेकर  मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया जहां उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने कहा कि यदि घटना के तत्काल बाद उसे अस्पताल लाया जाता तो संभवतः उसकी जान बच सकती थी। 

जमीन पर सर्वाधिक घटनाएं 

  सर्प दंश की जमीन पर सोने के दौरान अधिकांश घटनाएं हुई।  स्वास्थ्य विभाग के द्वारा भी ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लोगों को खाट अथवा पलंग पर सोने की सलाह दी जा रही है, मगर संभवतः गरीबी अथवा जागरूकता की कमी की वजह से अभी भी बड़ी आबादी जमीन पर ही सोती है। कई परिवार अभी भी ऐसे हैं जो सर्प दंश होने पर अस्पताल जाने के बजाए झाड़ फूंक पर अधिक विश्वास करते हैं।  मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी इलाज के दौरान ऐसे दृश्य देखने को मिले हैं जब परिजनों ने वार्ड में ही बैगा को बुला लिया और मरीज की झाड़ फूंक कराई। लोगों में अभी भी अंध विश्वास और जागरूकता की कमी अक्सर  सर्प दंश पीड़ितों की मौत का कारण बनती है।

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