सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को मिली नई जिंदगी ... रेस्क्यू दल के भागीरथ प्रयास ने दिवाली मनाने दिया एक और मौका ... खुशी से झूम उठा देश .... लगे भारत माता के जयकारे... सभी श्रम वीर सकुशल .. मंगल लेकर आया मंगलवार ..... पीएम मोदी ने कहा भावुक करने वाला है क्षण ....

सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को मिली नई जिंदगी ... रेस्क्यू दल के भागीरथ प्रयास ने दिवाली मनाने दिया एक और मौका ... खुशी से झूम उठा देश .... लगे भारत माता के जयकारे... सभी श्रम वीर सकुशल .. मंगल लेकर आया मंगलवार ..... पीएम मोदी ने कहा भावुक करने वाला है क्षण ....

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 अंबिकापुर (सूत्र)। उत्तरकाशी के  सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को रेस्क्यू टीम की 17 दिनों के भागीरथ प्रयास से आखिरकार नई जिंदगी मिल गई। आज मंगलवार को देर शाम जैसे ही श्रमिकों को बाहर निकाला गया समूचा देश खुशी से झूम उठा। सुरंग से बाहर आए श्रमिकों को जवानों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने गले से लगा लिया। भारत माता के जय घोष के साथ फुलमालाओ से स्वागत करते हुए सभी का मुंह मीठा कराया गया। श्रमिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सालय ले जाया गया है। सभी श्रम वीरों के सकुशल सुरंग से बाहर आने पर दिवाली के समान दीए जलाए गए और जमकर आतिशबाजी हुई।  मुख्यमंत्री धामी भी मौके पर मौजूद रहे और श्रमिकों को न सिर्फ गले लगाया बल्कि अपने हाथो से उन्हे मुंह मीठा कराया। मंगलवार की रात 8.41 बजे रेस्क्यू टीम ने सुरंग में फंसे श्रमिकों तक पाइप पहुंचने में सफलता पाई और एक - एक कर  सभी श्रम वीरों को बाहर निकाल लिया गया। 17 दिनों तक अंधेरे सुरंग में श्रमिकों ने धैर्य बनाए रखा और भीतर से ही सुरंग से मिट्टी हटाने की कोशिश करते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों को शाबाशी देते हुए इसे टीम वर्क,  भावनाओं की जीत बताया, उन्होंने कहा कि यह पल भावुक करने वाला है।  विदित हो कि श्रमिकों को  सुरक्षित बाहर  निकालने में ऑगर मशीन फेल हो गई थी। जिससे सबकी चिंता बढ़ गई थी। बचाव अभियान रैट माइनिंग यानी चूहों की तरह खोदाई के सहारे आगे बढ़ते हुए पाइप भीतर डालने प्रयास किया जाता रहा। रैट माइनर्स की छह सदस्यीय टीम मौके पर सोमवार  से ही मौके पर मौजूद रही। पहाड़ के ऊपर से भी खोदाई का काम चल रहा था। सोमवार तक   31 मीटर यानी 100 फुट से अधिक की खोदाई की जा चुकी थी। जिससे दो से तीन दिन में मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिए जाने की उम्मीद जताई जा थी । सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण करने वाली सेना की इकाई सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पूर्व मुख्य इंजीनियर और बचाव अभियान में जुटे लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह (सेवानिवृत्त) रेस्क्यू टीम को लगातार परामर्श देते रहे। उन्होंने सोमवार को मीडिया को जानकारी दी थी कि 31 मीटर तक वर्टिकल ड्रिलिंग कर ली गई है। जमीन के अंदर की स्थिति जानने के लिए छह इंच के पाइप को 70 मीटर तक बोर किया गया है और सबकुछ ठीक मिला है। 800 एमएम व्यास के पाइप को बोर करने के लिए फ्रेम तैयार कर लिया है। सबकुछ ठीक रहा तो अगले एक से डेढ़ दिन में 10 मीटर तक बोर किया जा सकता है। रेस्क्यू दल इसी तकनीक से आगे बढ़ती रही और मंजिल तक पहुंची। सुराख पूरा होने और पाइप से रौशनी पहुंचते ही श्रमिक खुशी से झूम उठे। परिजनों के द्वारा भी आज हवन ,पूजन के साथ आज दिवाली  मनाई जा रही है। रेस्क्यू टीम में सेना के जवान, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के अलावा विभिन्न एजेंसियां सक्रिय रही और आपसी समन्वय के साथ सफल आपरेशन को अंजाम दिया गया। 

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