काव्यगोष्ठी : हादसों का पता नहीं होता, समय का चेहरा नहीं होता... दिल दुखाना गुनाह है लोगों, किसके दिल में खुदा नहीं होता ...- यादव विकास
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दिसंबर 10, 2023
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अंबिकापुर। मानव अधिकार दिवस पर तुलसी साहित्य समिति द्वारा शायर-ए-शहर यादव विकास की अध्यक्षता में केशरवानी भवन ब्रम्हरोड अंबिकापुर में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रह्मा शंकर सिंह, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि-साहित्यकार एसपी जायसवाल व उपभोक्ता अधिकार संगठन छतीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभूषण मिश्र थे। मां वीणावती के सामूहिक वंदन व कवयित्री अर्चना पाठक की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कविवर एसपी जायसवाल ने कहा कि मानव अधिकार दिवस प्रतिवर्ष 10 दिसम्बर को मनाया जाता है। 10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्रसंघ ने मानव अधिकारों की घोषणा की थी। पं. चंद्रभूषण मिश्र ने कहा कि मानव की अंतर्निहित गरिमा को बचाए रखना मानवाधिकार का उददेश्य है। इसके लिए देश व राज्यों में आयोग का गठन किया गया है। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण के अधिकारों पर भी प्रकाश डाला। वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रह्माशंकर सिंह ने महर्षि अरविंद के समाधि दिवस पर अपने विचार रखे और कहा कि महर्षि अरविंद एक महान स्वतंत्रता सेनानी, कवि और गुरु भी थे। उन्होंने वेद-उपनिषदों पर अनेक भाष्य लिखे। उनके दार्शनिक विचारों का प्रभाव आज समूचे विश्व में दिखाई देता है। काव्यगोष्ठी में बेटियों को उनके अधिकारों से वंचित रखे जाने पर कववित्री माधुरी जायसवाल ने अपने काव्य में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि घर में हमारी बेटियां मायूस और बर्वाद है। दिल पर हाथ रखकर कहिए बेटियां क्या आजाद है? .... कवयित्री मंशा शुक्ला ने मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन पर अपनी कविता पेश की हदा में घुला आज कैसा जहर है, मनुज ही मनुज पर दाता कहर है। सस्ता हो गया अब तो जीवन, धमाकों से जलते शहर-के-शहर है। कवयित्री व अभिनेत्री अर्चना पाठक ने अपने काव्य में मानवाधिकारों को प्राणों का रक्षक बताया- हंस पे तीर चलाया देवदत्त ने, सिद्धार्थ ने किया उसका उपचार। हर युग में वही विजयी रहा, जिसके साथ खड़ा मानवाधिकार। कविवर श्यामबिहारी पाण्डेय ने मानवाधिकारों की व्याख्या सरल शब्दों में की .. हर नर का सम्मान हो, मानव का अधिकार। मानव से ही चल रहा, जग-जग का व्यापार। मानव का अधिकार है उत्तम शिक्षा, स्वास्थ्य। नानव का कल्याण हो, मानवता हो साध्य। प्रसिद्ध गीतकार पूनम दुबे 'वीणा के दोहे में मानव सेवा कीजिए, सुंदर यही विचार। होती पूरी कामना, तुख का है आसार। लाखों लोगों की दुआ, आती है फिर काम। नेकी मिलती है सदा, मन पाए आराम। कवयित्री अंजू पाण्डेय ने मानवाधिकारों से वंचित गरीबों की पीड़ा व सामाजिक उपेक्षा का दर्द बयान किया- हां, मैं गरीब हूं। अब तो जीने से भी डरता हूं क्योंकि हर रोज ही मरता है। अब तो कोई सरोकार नहीं, ईश्वर से भी दरकार नहीं। वीर रस के कवि अम्बरीष कश्यप का भी दर्द उनकी कविता में छलक पड़ा- शरास मजबूर है कहे कैसे और इस गम को सहे कैसे? हर जगह सेतुओं का रोहा है. अपनी रफ्तार में बढ़े कैसे। कवयित्री गीता द्विवेदी ने अपनी रचना में आंधियों को विपत्तियों की संज्ञा देते हुए उसे मेंहमान की तरह बताया- बिन बुलाए मेहमान-सी आती है आंधिया। फिर जमके उत्पात मचाती है आंधियां... । कवि उमाकांत पाण्डेय ने मानवाधिकारों के हो रहे हनन के बीच इंसानों को प्रकृति से जुड़ने उनसे प्रेरणा लेकर हमेशा खुश रहने का संदेश दिया- तुम गाते रहना, नित नवीन सपनों के सुमन सजाते रहना। पेड़ों पर लिख आना कोई नाम, कॉपलों से बतियाते रहना। कमोबेश यही बात गीत- कवि कृष्णकांत पाठक ने भी कही- प्यार करने का बहाना ढूंढिए... बन- संवरने का बहाना ढूंढिए। जो दिखाए जिंदगी को रास्ता, आए जिसको मुस्कुराना ढूंढ़िए। कवि अजय श्रीवास्तव ने दीवानगी की हद में अपनी प्रेयसी से यहां तक कह दिया कि तेरी में खुशियां पूरी कर दूँ, सारी दुनियां तेरे कदमों में कर दूं। वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे ने इश्कबाजी की सरस कविता पेश कर महफिल लूट ली- मजबूरी में हाथ छुड़ाना याद आता है बहुत प्रिये। साझ पड़े मेरे घर आना, बैठे बैठे बातें करना। बातों का अनमोल खजाना याद आता है बहुत प्रिये! लोकगायिका व कवयित्री पूर्णिमा पटेल के उम्दा गीत सरगुजा गाजमगुजा, माटी कर देव पहार कर पूजा ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सच है. अहंकार इंसान को ले डूबता है। इसे छोड़ने में ही उसकी भलाई है। कवि प्रकाश कश्यप ने यह नेक सलाह दी- काबर ले करथा गुमान बउआ, जिनगी के नहए ठेकान दरआ। कविवर एसपी जायसवाल ने गरीबी का करूण चित्रण किया- बिगर पनही कर पांव में देखें फाटे रहिस बेवाई। मूड़ में लकरी कर बोझा अउ कोरा में लरिका। कनिहा गइस टेड़गाई। छत्तीसगढ़ में चुनाव परिणाम पश्चात् सरकार गठन को लेकर चल रहे कयासों के बीच संस्था के अध्यक्ष दोहाकार व शायर मुकुंदलाल साहू ने विजयी दल का आव्हान करते हुए दोहे सुनाए जनादेश तुमको मिला, गढ़ो नई सरकार। चमको सूरज की तरह, मिट जाए अंधियार। इनके अलावा कवि अभिनय चतुर्वेदी ने भी श्रीकृष्ण चरित्र पर कविता पढ़ी। अंत में, शायर-ए -शयर यादव विकास की इस संदेशपरक शानदार गजल से गोष्ठी का यादगार समापन हुआ.. हादसों का पता नहीं होता, समय का चेहरा नहीं होता। दिल दुखाना गुनाह है लोगों, किसके दिल में खुदा नहीं होता। विकास तुमसे तमन्ना रखते, खुदा का आसरा न होता। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री अर्चना पाठक व आभार संस्था की कार्यकारी अध्यक्ष माधुरी जायसवाल ने जताया। इस अवसर पर लीला यादव, सच्चिदानंद पाण्डेय, मदालसा गुप्ता केशरवानी पैश्य सभा के उपाध्यक्ष मनीलाल गुप्ता सहित कई काव्यप्रेमी उपस्थित रहे।




