अंबिकापुर/ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपनी पदस्थापना में संशोधन कराने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए दस दिन के भीतर याचिका दायर करने वालों को संशोधित स्कूलों में ज्वाइनिंग कराने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय के पिछले आदेश की शिक्षा विभाग द्वारा किए गए भ्रमपूर्ण व्याख्या को भी उच्च न्यायालय के द्वारा अपास्त करने का आदेश दिया। न्यायलीन सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सहायक शिक्षक से शिक्षक और शिक्षक से प्रधान पाठक के पदपर पदोन्नति की प्रक्रिया अप्रैल मई में काउंसलिंग के आधार पर शुरू की गई थी। इस दौरान पोस्टिंग में कई शिक्षकों को दूर दराज और अन्य जिलों में पोस्टिंग मिल गई । पोस्टिंग से असंतुष्ट कई शिक्षकों ने पोस्टिंग लेते ही संशोधन के लिए आवेदन किया , जिससे संयुक्त संचालक ने इन शिक्षकों के आवेदन पर विचार करते हुए सुविधानुसर समीप के स्कूल में पोस्टिंग दे दी। इसके बाद चार सितंबर को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने शिक्षकों के नई पोस्टिंग को निरस्त करते हुए एकतरफा शिक्षकों को संशोधित स्कूलों से कार्यमुक्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ शिक्षकों के द्वारा हाईकोर्ट की शरण ली गई। 11 सितंबर 2023 को जस्टिस अरविंद चंदेल ने सुनवाई करते हुए यथा स्थिति बनाए आर आदेश दिया था। सूत्रों के मुताबिक इस आदेश से सभी शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई थी, जिससे वे न तो स्कूलों में ज्वाइनिंग कर पाए और न ही संशोधित स्थान वाले स्कूल में लौट पाए। इसके बाद 3 नवंबर को हाईकोर्ट ने अंतिम निर्णय पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता शिक्षकों के अभ्यावेदन पर 45 दिनों के भीतर नए निर्णय लेने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के नेतृत्व में कमेटी बनाने कहा गया था। हाईकोर्ट ने पिछली संशोधित पोस्टिंग वाले स्कूल में जॉइनिंग के निर्देश दिए थे। शिक्षकों का आरोप था कि उच्च न्यायलय के इस निर्देश की शिक्षा विभाग ने भ्रमपूर्ण व्याख्या की। जिसमें यह कहा गया कि पिछली पोस्टिंग का मतलब संशोधित स्कूल नहीं, बल्कि पदोन्नति के बाद हुई पहली पोस्टिंग है। मूल स्कूल में जाने के लिए बाध्य करने के विरोध में शिक्षकों ने अधिवक्ता देवनारायण यादव, धीरेंद्र कुमार पांडे, अवध त्रिपाठी, मनोज परांजपे, अजय श्रीवास्तव, केशव कुमार वर्मा, राजेश कुमार कौशिक के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। पांच दिसंबर को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविन्द सिंह चंदेल ने 10 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को संशोधित स्कूल में जाइनिंग देने के निर्देश दिए। इसके साथ राज्य शासन से जारी गलत व्याख्या वाले निर्देश को भी अपास्त करने का आदेश दिया है।
ब्रेकिंग : शिक्षकों को उच्च न्यायालय ने दी राहत... अब संशोधित स्थान पर ले सकेंगे पोस्टिंग ... दस दिन में प्रक्रिया पूरी करने आदेश ... ** शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट के पिछले आदेश की भ्रमपूर्ण व्याख्या कर नई पोस्टिंग निरस्त करते हुए शिक्षकों को संशोधित स्कूलों से कर दिया था कार्यमुक्त ...
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दिसंबर 08, 2023
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