बालकृष्णन ने कहा - स्क्रीन टाइम को एक्टिविटी टाइम बनाए तकनीक से नवाचार और राष्ट्रनिर्माण संभव ..! इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर में डिजिटल प्लेटफार्म पर संगोष्ठी

बालकृष्णन ने कहा - स्क्रीन टाइम को एक्टिविटी टाइम बनाए तकनीक से नवाचार और राष्ट्रनिर्माण संभव ..! इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर में डिजिटल प्लेटफार्म पर संगोष्ठी

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अंबिकापुर ।।खबरी गुल्लक।।

इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर में आज आयोजित प्रेरणादायी कार्यक्रम में हैदराबाद से आये राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री  एस. बालकृष्णन ने विद्यार्थियों से जोर देते हुए कहा कि स्क्रीन टाइम को सिर्फ उपभोग के समय के रूप में नहीं देखना चाहिए; इसे सक्रिय, रचनात्मक और राष्ट्रोन्मुख कार्यों के लिए विकसित कीजिए। उन्होंने तकनीकी शिक्षा को केवल स्क्रीन-आधारित ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने पर बल दिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और तकनीकी प्रोजेक्ट्स के विकास के लिए करने की प्रेरणा दी।

 इस कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्राचार्य डॉ. राम नारायण खरे द्वारा की गई और मुख्य अतिथि  एस बालकृष्णन के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ से  महेश साकेत राज्य संगठन मंत्री रायपुर,  अनंत सोनी राष्ट्रीय मंत्री एवं  रोहिणी मिश्रा नगर मंत्री उपस्थित रहे।

भाषण की झलकियां

 तकनीकी शिक्षा का लक्ष्य: श्री बालकृष्णन ने कहा कि तकनीकी शिक्षा केवल सैद्धान्तिक या स्क्रीन पर आधारित जानकारी नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल, रिसर्च और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी होनी चाहिए।  

स्क्रीन का सकारात्मक उपयोग: उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि मोबाइल व इंटरनेट का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए न करके ई-लर्निंग, ऑनलाइन कोर्स, समय प्रबंधन और आत्म-विकास हेतु करें। ऐसे करने से स्क्रीन टाइम स्वाभाविक रूप से एक्टिविटी टाइम में बदल जाएगा।  

नवाचार और स्टार्टअप: डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्टार्टअप और तकनीकी प्रोजेक्ट्स के विकास के साधन के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया। छात्रों को AI, रोबोटिक्स और रिसर्च-आधारित प्रोजेक्ट्स में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।  

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अनुरूप शिक्षा: उन्होंने स्किल डेवलपमेंट, प्रायोगिक शिक्षा और बहुआयामी अधिगम को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  

 संस्कृति एवं नैतिकता: तकनीकी शिक्षा को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति से जोड़ते हुए समाज और राष्ट्रहित में नवाचार विकसित करने का संदेश दिया गया।

अतिथियों ने यह भी कहा 

 महेश साकेत ने कहा कि तकनीकी शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय चेतना के साथ तकनीकी ज्ञान का उपयोग करने का आग्रह किया।  

 अनंत सोनी ने अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक जीवन मूल्यों पर बल देते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी अपना स्क्रीन टाइम रचनात्मक रूप से उपयोग करें तो वे न केवल उत्कृष्ट इंजीनियर बनेंगे बल्कि समाजोपयोगी तकनीकी नवाचार भी कर सकेंगे।  

 प्राचार्य डॉ. राम नारायण खरे ने संस्था में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में स्क्रीन आधारित उपकरणों का उपयोग अनिवार्य हो गया है; परंतु यदि इसे नियंत्रित व सकारात्मक रूप में उपयोग किया जाए तो यह विद्यार्थियों के लिए उत्पादक समय बन सकता है अन्यथा यह समय, ध्यान और उत्पादकता को प्रभावित करेगा।

समापन और सम्मान

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को शॉल, श्रीफल एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। अंत में राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक, स्टाफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे, जिन्होंने प्रस्तुत विचारों से प्रेरणा लेने का आश्वासन दिया। प्रोफेसर महीधर दुबे ने आभार प्रकट किया।


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