बक्सर।। खबरी गुल्लक ।।
बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ करीब 15 साल से खड़ा 132 फीट ऊँचा मोबाइल टावर अचानक गायब मिल गया। मामला उस समय प्रकाश में आया जब टावर की मरम्मत के लिए जीटीएल कंपनी के टेक्नीशियन और अधिकारी मौके पर पहुँचे और वहाँ केवल खाली मैदान देखा, टावर, 15 केवीए जनरेटर और अन्य तकनीकी उपकरणों का कोई सुराग नहीं था।
घटना का ऐसे चला पता
टावर कई वर्षों से निष्क्रिय पड़ा था और कंपनी ने हाल ही में मरम्मत व पुनः सक्रिय करने का निर्णय लिया था। मरम्मत टीम के आने पर ही टावर व उससे जुड़ी सभी सामग्रियाँ गायब पाईं गईं। स्थानीय लोगों ने भी पिछले 15–20 दिनों से टावर नहीं दिखने की बात कही, पर शुरू में उन्हें लगा कि कंपनी ने इसे स्वेच्छा से हटाया होगा। घटना के बाद जीटीएल कंपनी ने आधिकारिक शिकायत स्थानीय पुलिस में दर्ज कराई है और प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।
लाखों का नुकसान
जीटीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टावर का स्थान और सारे उपकरण कंपनी की संपत्ति हैं। प्रत्यक्ष नुकसान में टावर के लोहे, जनरेटर व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि खोई हुई चीज़ों का अनुमानित वाजिब मूल्य लाखों में हो सकता है, विस्तृत मूल्यांकन निरीक्षण के बाद जारी किया जाएगा। डुमरांव थाने के प्रभारी ने कहा कि मामला गंभीर है और टीम लगा दी गयी है। प्रथम दृष्टि में यह पेशेवर चोरी का मामला प्रतीत होता है क्योंकि इतने बड़े टावर को हटाने व ट्रांसपोर्ट करने के लिये भारी मशीनरी और योजना की आवश्यकता होती है। साथ ही इलाके के आस-पास लगे सीसीटीवी फुटेज, मालिकाना कागजात और स्थानीय ट्रकों के रजिस्टर की पड़ताल की जा रही है।
रोचक व चिंताजनक तथ्य
तकनीकी चुनौती: 132 फीट ऊँचे टावर को रातों-रात हटाना साधारण चोरी नहीं माना जा सकता; इसके लिये क्रेन, कटिंग टूल्स और कई वाहन चाहिए होते हैं , जिससे यह घटना संगठित गिरोह या पेशेवर लोगों द्वारा की गई संभावना जताई जा रही है। टावर के लोहे को स्क्रैप के रूप में स्थानीय धातु बाजार में तुरन्त बेचा जा सकता है। पुलिस को यह देखना होगा कि क्या किसी स्थानीय स्क्रैप कारोबारी ने असामान्य मात्रा में लोहे की खरीद-फरोख्त की। टावर वर्षों से बंद था, जिससे कंपनी के द्वारा स्थानिक सुरक्षा व निगरानी की कमी का फायदा उठाया गया हो सकता है।




