महामाया खुली खदान परियोजना में रोजगार पर भेदभाव का आरोप .. प्रभावित ग्रामीणों ने कहा 7 दिन में मांग पूरी नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन..! नारेबाजी कर सूरजपुर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

महामाया खुली खदान परियोजना में रोजगार पर भेदभाव का आरोप .. प्रभावित ग्रामीणों ने कहा 7 दिन में मांग पूरी नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन..! नारेबाजी कर सूरजपुर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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सूरजपुर।।खबरी गुल्लक 

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के ग्राम जरही एवं आसपास के कॉलेज प्रभावित क्षेत्रों के दर्जनों परिवारों ने महामाया खुली खदान परियोजना में रोजगार से संबंधित नियमों के दुरुपयोग व भेदभाव का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।  ग्रामीणों का कहना है कि एक ही परियोजना के अंदर विभिन्न समयों पर अलग-अलग नियम लागू किए जाने से कुछ परिवारों को रोजगार मिला जबकि कई पात्र हितग्राही वंचित रह गए हैं।ग्रामीणों ने  आवेदन में बताया है कि परियोजना के समय ग्राम सभा व जनसुनवाई में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि किसी प्रभावित परिवार की जमीन अधिग्रहित होती है, यदि सिर्फ न्यूनतम 1 डिसमिल भूमि अधिग्रहित हुई हो तो भी वह रोजगार के लिए पात्र माना जाएगा। साथ ही यह भी बताया गया था कि नियमानुसार क्लबिंग  का लाभ लिया जा सकता है। इसी आधार पर पिछले वर्षों में कई प्रभावित परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया तथा कई मामलों में एक ही भूमि के आधार पर एक से अधिक व्यक्तियों को भी नियुक्त किया गया।

विवाद की यह है जड़

ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के बाद अन्य पात्र हितग्राहियों के मामलों में अलग-अलग और सख्त नियम लागू कर दिए गए, जिनके कारण बहु-संख्या प्रभावित परिवार रोजगार से वंचित रह गए। आवेदन में कहा गया है कि इससे समानता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन नियमों के आधार पर पहले नौकरी दी गई थी, वही नियम शेष पात्र हितग्राहियों पर भी लागू किए जाएं और सभी लंबित नौकरी प्रकरणों की शीघ्र समीक्षा कर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

ग्रामीणों की यह है मांगें

 परियोजना में लागू द्वैध व भिन्न-भिन्न नियमों को समाप्त किया जाए, पहले जिन नियमों के तहत रोजगार दिया गया था, वही नियम सभी शेष पात्र हितग्राहियों पर समान रूप से लागू किए जाएं, सभी लंबित रोजगार प्रकरणों की शीघ्र समीक्षा कर नियमानुसार फैसला किया जाए,  जिन लोगों को नौकरी दी गई, उनकी पात्रता का आधार और किन नियमों/नीतियों के तहत नियुक्ति हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए,  संबंधित फाइल नोटशीट व जांच प्रतिवेदनों की प्रतिलिपियाँ उपलब्ध कराई जाएँ।

दी गई यह चेतावनी

आवेदन में ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि आवेदन प्रस्तुत किए जाने के 7 दिनों के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से कोल परिवहन बंद कर आंदोलन कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी परियोजना के प्रबंधन की होगी। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति के रोजगार को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि सभी प्रभावित परिवारों को समान नियम एवं अवसर सुनिश्चित कराना है।



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