अंबिकापुर ।।खबरी गुल्लक।।
छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस की सरगुजा जिला इकाई ने मुख्यमंत्री को एक निर्णायक 9 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा, जिसमें जिले के लाखों छोटे और सीमांत किसानों की तीव्र समस्याओं खाद और बीज की किल्लत, डीजल की कमी और वितरण पाबंदियाँ, कृषि बिजली दरों में वृद्धि, धान की एकमुश्त भुगतान की मांग तथा लंबित विभागीय अनुदान को तत्काल निपटाने की अपील शामिल है। किसान नेताओं ने प्रशासनिक नीतियों को अव्यावहारिक और किसान विरोधी करार दिया और त्वरित सुधार की चेतावनी दी। संगठन ने हाल ही में लागू किए गए प्रति एकड़ एक बोरी खाद की पात्रता नियम को तुगलकी और अव्यावहारिक बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस नियम से फसल के अनुसार खाद की वास्तविक जरूरत पूरी नहीं हो पाएगी। जिन किसानों को 5 एकड़ से अधिक जमीन है उन्हें खाद तीन बार में बांटने का नियम लागू किया गया है, जिसे संगठन ने बंद कर सबको एकमुश्त खाद उपलब्ध कराने की मांग रखी है।किसानों को आवश्यकता अनुसार खाद-बीज लेने की स्वतंत्रता: संगठन ने कहा कि खाद की मात्रा और प्रकार का आकलन केवल किसान कर सकता है, न कि प्रशासन, इसलिए पूर्व व्यवस्था की तरह स्वतंत्रता बहाल की जाए। किसान नेताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की भारी किल्लत, और ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनों व सीमित मात्राओं की आलोचना की। उन्होंने जरकिन/कैन में डीजल देने पर लगी पाबंदी हटाने की मांग की। बढ़ती बिजली दरें और अघोषित कटौती से सिंचाई प्रभावित हो रही है। संगठन ने कृषि पंपों के लिए बिजली मुक्त करने और कटौती पर रोक लगाने की मांग रखी। निजी विक्रेताओं द्वारा हो रही जमाखोरी व ऊँची दर पर बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई और पूरे प्रदेश में खाद की समान दर सुनिश्चित करने की माँग की गई। प्रीतिधिमंडल ने वर्तमान नकद-खाद मिश्रित व्यवस्था जटिल है। संगठन ने कृषि क्रेडिट की सीमा बढ़ाने और सरल/पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांग की। पिछले वर्षों के बकाये और बोनस सहित कुल राशि एकमुश्त देने की मांग की गई, ताकि किसान अगली फसल व घर परिवार की आवश्यकताएं पूरा कर सकें।
किसानों की यह है पीड़ा
किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने बताया कि खेतों से लेकर मंडियों तक किसान खाद, बीज और डीजल के लिए दैनिक संघर्ष कर रहे हैं। किसान सुबह उम्मीद लेकर निकलते हैं, शाम को सिर्फ कतारें और बहाने मिलते हैं, उन्होंने कहा। संगठन ने कहा कि राजनीतिक स्वागत-समारोह और बड़े-बड़े वादों से काम नहीं चलेगा; अब धरातलीय नीतिगत सुधार आवश्यक हैं।मांग-पत्र में जिला कृषि विभाग द्वारा बीज व अन्य सामग्री वितरण में आ रही खामियों का भी जिक्र है। किसान नेताओं ने कहा कि सोसायटी स्तर पर वितरण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लानी होगी, और दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की जानी चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
किसान कांग्रेस का मानना है कि अगर खाद तथा इनपुट्स की आपूर्ति बाधित रही, तो खरीफ सीजन में फसल उत्पादन प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाएगा, जिससे न सिर्फ किसान बल्कि कृषि-आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। कृषि बिजली व डीजल की समस्या से सिंचाई व मशीनरी निर्भर खेती संकट में पड़ सकती । किसान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री तथा जिला कलेक्टर से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है और कहा कि यदि उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन शांति पूर्ण परन्तु सक्रिय आंदोलन करने के विकल्प पर विचार करेगा।




