अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने नीट- स्नातक पेपर लीक विवाद, छात्रों-युवाओं के देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र, अभिभावक और युवा पिछले कई सप्ताह से सरकार से स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे। इसके 47 दिन बाद आई प्रतिक्रिया में भी छात्रों की पीड़ा, अभिभावकों की चिंता और उन परिवारों के दु : ख के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दी।
परवेज़ गांधी ने कहा प्रधानमंत्री जी इस गंभीर मुद्दे पर बोलने में आपको 47 दिन लग गए, लेकिन जब आपने अपनी बात रखी, तब उन माता-पिता के लिए संवेदना का एक शब्द भी नहीं निकला, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया। देश के करोड़ों युवाओं की उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देंगे, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाएंगे और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की ठोस घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि नीट-स्नातक जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़े विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत, आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक दबाव के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो सबसे अधिक नुकसान उन मेहनती छात्रों का होता है, जिन्होंने अपने भविष्य के लिए दिन-रात परिश्रम किया है।
परवेज़ गांधी ने कहा कि हाल के दिनों में देशभर में छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उनकी मांगों को अनसुना करना या केवल औपचारिक प्रतिक्रिया देना समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा। साथ ही, जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके प्रति संवेदना व्यक्त करना और उनकी परिस्थितियों को गंभीरता से लेना भी सरकार का नैतिक दायित्व है।
परवेज़ आलम गांधी ने कहा कि देश का युवा केवल भाषण नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता, जवाबदेही और भविष्य की सुरक्षा चाहता है। सरकार को छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली पर फिर से विश्वास कायम हो सके।




