सांसद कंगना ने कहा - जेन‑ जेड गटर पीढ़ी.. छात्र आंदोलन पर भद्देपन और कॉकरोच टिप्पणी से भड़का विवाद.. कांग्रेस ने फूंका पुतला

सांसद कंगना ने कहा - जेन‑ जेड गटर पीढ़ी.. छात्र आंदोलन पर भद्देपन और कॉकरोच टिप्पणी से भड़का विवाद.. कांग्रेस ने फूंका पुतला

khabrigullak.com
By -
0

नई दिल्ली। खबरी गुल्लक ।

बॉलीवुड अभिनेत्री व हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत की सोशल मीडिया पोस्ट ने छात्र आंदोलनों के बाद नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के खत्म होने के कुछ दिनों बाद रविवार‑ सोमवार को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक पोस्ट में कंगना ने प्रदर्शनकारियों और विशेषकर जेन‑ज़ेड पीढ़ी पर तीखे शब्दों का प्रयोग किया, जिसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ और राजनीतिक बहस शुरु हो गई है। कंगना ने जंतर‑ मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े वीडियो को गंदगी, कचरा और भद्देपन का प्रदर्शन बताया। उन्होंने लिखा कि मैंने अपनी जिंदगी में कभी किसी एक जगह पर इतना भद्दापन नहीं देखा। कंगना ने कहा कि ये युवा कॉकरोच की तरह दिखते और व्यवहार करते हैं, और इसे डिजिटल डिटॉक्स की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने इन क्लिप्स से होने वाली उबकाई का ज़िक्र भी किया। उन्होंने लिखा कि भारत खूबसूरत, शालीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लोगों का देश है और इस तरह के वीडियोज़ देश की छवि को गंदा करते हैं।

यह टिप्पणी 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद  आई है, जब 36 दिन तक चले आंदोलन ने देश की शिक्षा नीतियों और शैक्षणिक अनियमितताओं पर आशंकाओं व गम्भीर बहसों को जन्म दिया था। आंदोलन का नेतृत्व सोशल मीडिया एकाउंट काकरोच जनता पार्टी के बैनर तले किया था, जिसमें बड़ी संख्या में वामपंथी विचारधारा से जुड़े युवा शामिल थे।

कंगना की टिप्पणी पर विपक्षी दलों और छात्रों व सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तीखी आपत्तियाँ जताईं। आलोचकों ने कहा कि एक सांसद  द्वारा कोई भी समुदाय या पीढ़ी को उपहास में प्रस्तुत करना अस्वीकार्य है और इससे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। कुछ समर्थकों ने हालांकि कंगना के बयान को सत्य बोलने वाला और घटिया संस्कृति की आलोचना मानकर उनकी बात का समर्थन किया।

एक सांसद के रूप में कंगना के इन शब्दों से यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या सार्वजनिक पद पर बैठे प्रतिनिधि ऐसे अपमानजनक और जेनर‑आधारित भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि भाषा की ऐसी तीखी अभिव्यक्ति से सार्वजनिक संवाद का स्तर नीचे गिरता है।आंदोलन में शामिल कुछ छात्रों ने रिपोर्टर्स से कहा कि विरोध का उद्देश्य सिस्टम की खामियों को उजागर करना था, न कि भद्देपन फैलाना। उन्होंने कंगना की भाषा को अनावश्यक अपमानजनक और ध्यान भटकाने वाली बताया, जो असल मांगों पर ध्यान केन्द्रित होने नहीं देती। कुछ छात्र‑नेताओं ने कंगना से सार्वजनिक माफी की माँग भी की है। 

समाजशास्त्रियों और मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि युवा पीढ़ी के प्रदर्शन और भाषा शैली पर सामान्यीकरण कर देना गलत है। उन्होंने जोर दिया कि संवाद की संस्कृति को सुधारने के लिए दोनों पक्षों को संयम और तर्कसंगत बहस की ज़रूरत है। एक प्रमुख मीडिया विश्लेषक ने कहा कि प्रभावशाली हस्तियों की भाषा सार्वजनिक सहमति और व्यवहार को प्रभावित करती है। कंगना रनौत का यह पोस्ट नए सिरे से बहस और आलोचना का कारण बना है। एक ओर जहां कुछ लोग उनकी बातों से सहमत हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे अपमानजनक और समाज विरोधी मानते हैं। कंगना रनौत के इस टिप्पणी के खिलाफ कांग्रेस के द्वारा प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन भी किया गया। 


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)