अंबिकापुर। खबरी गुल्लक। 6 अगस्त, 2026
सही मार्गदर्शन और मेहनत के साथ कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। इसका उदाहरण एक बार फिर देखने को मिला है, जहाँ राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की सामाजिक सरोकार पहल के तहत संचालित प्रतियोगी कोचिंग सेंटर से पढ़ाई करने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान परसा, बासेन, शिवनगर, सलका सहित पांच प्रतियोगी कोचिंग सेंटर संचालित किए गए। इन केंद्रों में 100 विद्यार्थियों को जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा , एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय तथा अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की निःशुल्क तैयारी कराई गई। विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित कक्षाएं, अभ्यास सत्र और मॉडल टेस्ट के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया गया। इस पहल का परिणाम यह रहा कि परसा गाँव की छात्रा सरगम सारथी का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ। वहीं, सलका की विमला सिंह और शालिनी मरकाम, शिवनगर की स्वाति सिंह, सलका के अरुण कुमार तथा बासेन के सुशांत सिंह श्याम और महंत पंडो ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में प्रवेश प्राप्त कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया।
इन विद्यार्थियों की सफलता ने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, अच्छी पढ़ाई और लगातार प्रयास के दम पर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। प्रतियोगी कोचिंग सेंटर का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाना है, जिन्हें आर्थिक या भौगोलिक कारणों से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती। इस पहल से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और उन्हें देश के प्रतिष्ठित आवासीय शिक्षण संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिला है।
चयनित विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए, इस पहल की सराहना की। स्थानीय लोगों ने भी इसे ग्रामीण बच्चों के शैक्षणिक विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। आरआरवीयूएनएल का प्रयास है कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों तक बेहतर शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर मिलें, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर समाज और देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकें।




