Incomplete action: Mule account holders in Surguja are facing the wrath of the mastermind, and the police investigation stalls even here.अधूरी कार्रवाई: सरगुजा में म्यूल एकाउंट धारकों पर गाज.. मास्टर माइंड सरगना की मौज! बस यहां..तक पहुंच पुलिस की पड़ताल अटक जाती है..

Incomplete action: Mule account holders in Surguja are facing the wrath of the mastermind, and the police investigation stalls even here.अधूरी कार्रवाई: सरगुजा में म्यूल एकाउंट धारकों पर गाज.. मास्टर माइंड सरगना की मौज! बस यहां..तक पहुंच पुलिस की पड़ताल अटक जाती है..

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक 

सायबर अपराधियों और सट्टे बाजों के द्वारा युवाओं को कमीशन का लालच देकर  बैंक खाता खुलवा उनके इस खाता में अपराध से कमाए गए पैसे का लेनदेन किया जा रहा है। ऐसे मामले में सरगुजा पुलिस केवल खाता धारक को पकड़ अपना पीठ थपथपा रही है जबकि वास्तविक अपराधी की परछाई तक नहीं छू पाई। हाल ही में सरगुजा के गांधीनगर पुलिस ने इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर के 10 विद्यार्थियों को सिर्फ इसलिए अपराधी घोषित करते हुए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि उनके बैंक खाते का उपयोग सायबर अपराधियों और सट्टे बाजों ने किया था। विद्यार्थियों को यह लालच देते हुए उनका बैंक खाता खुलवाया गया था कि वे इस खाता के एवज में उन्हें 5 से 7 हजार रुपए देंगे। मगर विद्यार्थियों को क्या पता था कि उनके खाते का उपयोग आपराधिक लेनदेन के लिए होगें, विद्यार्थियों ने खाता खुलवाया और अपराधियों ने खाते का चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अपने पास रखते हुए उन्हें 5 से 7 हजार रुपए थमा दिया। विद्यार्थी यह सोच कर खुश हो रहे थे कि उन्हें बिना मेहनत इतने रुपए मिल जाए, इन पैसों से कोई पाठ्य सामग्री खरीद रहा था तो कोई राशन सहित अन्य सामान। इसी बीच पुलिस की गाड़ी उनके कमरे के बाहर आकर रुकती है। संदिग्ध लेनदेन के खातेदार विद्यार्थियों को पकड़ लिया जाता है। कार्रवाई के दौरान पुलिस का रवैया इन विद्यार्थियों के प्रति ऐसा होता है मानो किसी बड़े अपराधी को पकड़ लिया गया हो। गिरफ्तारी के दौरान कई विद्यार्थियों को यह पता नहीं होता है कि आखिर उनका अपराध क्या है। उन्हें बाद में यह पता चलता है कि वे कैसे  अपराधियों के जाल में फंसे। केवल खाता बेचकर वे कथित तौर पर ठग गिरोह और सट्टेबाजों के साझेदार बन गए। इन विद्यार्थियों के खाते से एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक का लेनदेन हुआ था। 

कॉलेजों में दलालों की घुसपैठ 

बताया जा रहा है कि म्यूल एकाउंट खुलवाने ठग गिरोह,सट्टे बाजों के द्वारा महाविद्यालयों में बिचौलिया और दलाल की घुसपैठ कराई जा रही है। इन बिचौलियों के द्वारा युवाओं, विद्यार्थियों को आसानी से झांसा दिया जाता है। म्यूल एकाउंट खुलवाने में बिचौलियों को भी प्रति खाता 4 से 5 हजार रुपए मिलता है, जिससे बिचौलिए अधिक से अधिक लोगों को शिकार बनाते हैं। युवा मात्र 5 से 7 हजार रुपए की लालच में गिरोह का शिकार बन जाते हैं। 

अधूरी कार्रवाई 

इस मामले में पुलिस की कार्यशैली भी संदेह के दायरे में आ गई। खाता धारक विद्यार्थियों को पकड़ने में तो तत्परता पूर्वक रुचि दिखाई गई मगर मामले के जड़ तक जाकर गिरोह के सरगना, वास्तविक अपराधियों को पकड़ने में कोई रुचि नहीं ली गई। इस तरह के अधिकांश मामले में केवल म्यूल एकाउंट धारक पकड़े जा रहे हैं जबकि उनके बैंक खाते का उपयोग करने वाले वास्तविक अपराधियों को पकड़ने में कोई रुचि नहीं ली जा रही है। अधूरी कार्रवाई से पूरे गिरोह का पर्दाफाश संभव नहीं है। इसके पीछे जिम्मेदारों की मंशा स्पष्ट होनी चाहिए। 

 इसका फायदा मिल रहा सरगना,मास्टर माइंड को 

इस मामले में पुलिस के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि थाना और चौकियों में पहले से ही कर्मचारियों की कमी है। लगभग 30 से 35 फीसदी कर्मचारी कम होने का असर कामकाज में पड़ना स्वाभाविक है। किसी भी मामले के जड़ तक जाने शोध और अनुसंधान करना संभव नहीं हो पाता है, इसलिए जो आसानी से पकड़े गए पुलिस की कार्रवाई बस उन तक सीमित रहती है। ठगी, सट्टेबाजी के मामले में खाता धारकों को पकड़ना आसान है,जबकि मास्टरमाइंड तक पहुंचना टेढ़ी खीर होती है। कई बार पुलिस मैनपावर की कमी के कारण भी ऐसे मामलों के जड़ तक नहीं जा पाती है।  वीआईपी ड्यूटी, मौजूदा घटना क्रम, गश्त कार्रवाई में ही पुलिस उलझी होती है। विवेचक सहित अन्य कर्मियों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई प्रभावित हो गई है। 




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