गुजरात।।खबरी गुल्लक।।
गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामलों में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। पीठ जस्टिस एवाई कोगजे और जस्टिस समीर दवे ने विशेष अदालत द्वारा दी गई सजा संबंधी सभी अपील खारिज कर दीं। फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने यह फैसला बरकरार रखा।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मृतक परिजनों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा अगले साल 30 मार्च तक प्रदान किए जाएँ। 26 जुलाई 2008 को 70 मिनट में अहमदाबाद के 21 स्थानों पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 56 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए थे। हमलावरों ने अस्पतालों को भी निशाना बनाया था।
मुकदमे में कुल 78 आरोपियों पर मामले दर्ज थे। जांच के दौरान अहमदाबाद और सूरत की कुल 35 एफआईआर को जोड़कर सुनवाई की गई। आरोपियों में प्रतिबंधित संगठन Students Islamic Movement of India (SIMI) के पूर्व सरगना सफदर नागौरी और अन्य सहयोगी शामिल हैं। पीड़ित परिवारों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया और सजा का शीघ्र पालन चाहा।
विशेष लोक अभियोजक अमित पटेल ने बताया कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष सभी साक्ष्य पेश किए। अदालत ने डेढ़ साल से अधिक समय तक मामले की सुनवाई की और इस साल फरवरी से रोजाना सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। इससे पहले 1998 में तमिलनाडु के टाडा कोर्ट ने पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के मामले में एकसाथ 26 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।




