सफलता की कहानी: कंटूर ट्रेंच बनी जल संरक्षण की मजबूत आधारशिला, बेलटीकरी में थम रहा वर्षा जल का बहाव,मोर गांव, मोर पानी‘ अभियान ला रहा बदलाव, विकसित भारत जी-रामजी योजना से सशक्त हो रहा जल संरक्षण

सफलता की कहानी: कंटूर ट्रेंच बनी जल संरक्षण की मजबूत आधारशिला, बेलटीकरी में थम रहा वर्षा जल का बहाव,मोर गांव, मोर पानी‘ अभियान ला रहा बदलाव, विकसित भारत जी-रामजी योजना से सशक्त हो रहा जल संरक्षण

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सूरजपुर। खबरी गुल्लक। 31 जुलाई 2026

 वर्षा ऋतु में बड़ी मात्रा में वर्षा जल का बहकर व्यर्थ चले जाना तथा उसके साथ उपजाऊ मिट्टी का कटाव ग्रामीण क्षेत्रों की एक प्रमुख चुनौती रही है। इस चुनौती का प्रभावी समाधान अब सूरजपुर जिले में दिखाई देने लगा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित ‘मोर गांव, मोर पानी‘ महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।

   सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत बेलटीकरी में शासन की रोजगारमूलक योजना विकसित भारत जी-रामजी योजना के अंतर्गत कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र सिंह पाटले के निर्देश में निर्मित हजारों कंटूर ट्रेंच आज अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रही हैं। वर्षा के दौरान इन संरचनाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में वर्षा जल के बहाव को रोका जा रहा है, जिससे पानी भूमि में समाहित होकर भू-जल संवर्धन में सहायक बन रहा है।

                    कंटूर ट्रेंच के निर्माण से पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में मिट्टी का कटाव भी प्रभावी रूप से नियंत्रित हो रहा है। पहले जहां वर्षा का पानी तेज गति से बहकर उपजाऊ मिट्टी को अपने साथ ले जाता था, वहीं अब पानी की गति नियंत्रित होने से मिट्टी सुरक्षित रह रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव कृषि भूमि की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

                   इस कार्य से एक ओर स्थानीय ग्रामीणों को विकसित भारत जी-रामजी योजना के माध्यम से रोजगार उपलब्ध हुआ है, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण की स्थायी संरचनाएं भविष्य के लिए अमूल्य संपदा बन रही हैं। बेलटीकरी में निर्मित कंटूर ट्रेंच यह प्रमाणित कर रही हैं कि सामुदायिक सहभागिता, योजनाबद्ध कार्य और प्रशासनिक मार्गदर्शन के समन्वय से जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन संभव है। यह पहल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सशक्त उदाहरण है।

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