सूरजपुर।खबरी गुल्लक
सूरजपुर शहर में शासकीय सड़क की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में राजस्व न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। आरटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता डॉ डीके सोनी ने बताया कि न्यायालय ने भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि पर बने ट्रिपल स्टोरी भवन, कार्यालय, फैक्ट्री एवं बाउंड्रीवाल को अतिक्रमण मानते हुए संबंधित कब्जाधारी रितेश अग्रवाल (पिता–सुरेश अग्रवाल) को बेदखल करने का आदेश जारी किया है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार सूरजपुर स्थित खसरा क्रमांक 2630, कुल रकबा 1.975 हेक्टेयर, शासकीय सड़क मद में दर्ज है। पटवारी हल्का क्रमांक-08 की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि इस भूमि में से लगभग 0.033 हेक्टेयर पर पक्का ट्रिपल स्टोरी भवन, कार्यालय, फैक्ट्री एवं बाउंड्रीवाल का निर्माण कर कब्जा किया गया है। इसी आधार पर राजस्व न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर सुनवाई प्रारंभ की गई। सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता कुंजबिहारी गुप्ता ने न्यायालय में आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकारी भूमि पर बने भवन में फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है तथा अतिक्रमण हटाया जाना आवश्यक है। दूसरी ओर अनावेदक रितेश अग्रवाल ने न्यायालय में विस्तृत जवाब पेश कर पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और तथ्यों के विपरीत बताया। उन्होंने दावा किया कि पंचनामा उनकी अनुपस्थिति में तैयार किया गया, पुराने राजस्व नक्शों का सही परीक्षण नहीं किया गया तथा शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप निराधार है। उन्होंने दोनों पक्षों की उपस्थिति में पुनः सीमांकन और संयुक्त स्थल निरीक्षण कराने की मांग भी की।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के रिट क्रमांक 866/2026 (डी.के. सोनी एवं अन्य बनाम शासन) में पारित आदेश की प्रति भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। राजस्व न्यायालय ने पटवारी की रिपोर्ट, अभिलेखों एवं प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद माना कि संबंधित भूमि शासकीय सड़क के रूप में दर्ज है तथा उस पर निर्माण कर कब्जा किया जाना प्रमाणित होता है। इसके आधार पर न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने एवं संबंधित व्यक्ति को बेदखल करने का आदेश पारित किया।
आदेश में निर्देश दिया गया है कि संबंधित अनावेदक तीन दिवस के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाकर न्यायालय में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर राजस्व विभाग नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई करेगा।




