अंबिकापुर।।खबरी गुल्लक ।। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने कहा है कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को धीरे-धीरे कमजोर कर ग्रामीण भारत के गरीब परिवारों के रोजगार, सम्मान और आजीविका पर सीधा हमला कर रही है। एक तरफ़ जुलाई 1 से नई योजना लागू की जा रहा हैं , उन्होंने कहा कि मनरेगा कांग्रेस की दूरदर्शी सोच और सामाजिक न्याय की अवधारणा का परिणाम है, जिसने गांवों में रोजगार की गारंटी देकर करोड़ों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। आज उसी योजना को बजट में कटौती, भुगतान में देरी और नई प्रशासनिक बाधाओं के माध्यम से कमजोर किया जा रहा है। परवेज़ गांधी ने कहा कि मनरेगा ने देश के गांवों में केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि जल संरक्षण, तालाब निर्माण, सड़क, सिंचाई, भूमि सुधार और सामुदायिक विकास जैसे स्थायी कार्यों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। कोरोना महामारी के दौरान जब लाखों मजदूर शहरों से अपने गांव लौटे थे, तब मनरेगा ने ही उन्हें सम्मानजनक रोजगार देकर उनके परिवारों को भूख और आर्थिक संकट से बचाया। यह योजना ग्रामीण भारत की जीवनरेखा बनकर उभरी थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद केंद्र सरकार का रवैया लगातार मनरेगा विरोधी रहा है। मोदी सरकार ने लोकसभा में जवाब दिया है मार्च 2026 तक विभिन्न 34 राज्यों का 17,144.13 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार गरीब मजदूरों की मेहनत और उनके अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं है। यह राशि केवल सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवा और घर की रसोई से जुड़ा सवाल है। मजदूरों को समय पर भुगतान न मिलना उनकी मेहनत का अपमान है। परवेज़ गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार एक ओर गरीब कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को संसाधनों के अभाव में कमजोर कर रही है। राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना, भुगतान में देरी करना और कार्यों की स्वीकृति में बाधाएं उत्पन्न करना संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है। इससे ग्रामीण विकास की गति प्रभावित होगी और लाखों परिवार रोजगार के अवसरों से वंचित होंगे।
उन्होंने कहा कि देश आज बढ़ती महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी और कृषि संकट से जूझ रहा है। जून माह में सामान्य से कम वर्षा और खरीफ बुआई में आई गिरावट ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व मनरेगा को और मजबूत करना था, लेकिन दुर्भाग्य से उसे कमजोर किया जा रहा है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब किसानों, खेतिहर मजदूरों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ेगा।
परवेज़ गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का मत है कि मनरेगा को मजबूत किए बिना ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बनाया जा सकता। कांग्रेस लंबे समय से मनरेगा मजदूरों के लिए प्रतिदिन न्यूनतम 400 रुपये मजदूरी की मांग करती रही है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में वर्तमान मजदूरी दर श्रमिक परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि मनरेगा का समस्त लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए, मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर कम से कम 400 रुपये की जाए, योजना का बजट बढ़ाया जाए, राज्यों पर डाला गया अतिरिक्त वित्तीय बोझ समाप्त किया जाए तथा मनरेगा को कमजोर करने वाले सभी प्रावधान तत्काल वापस लिए जाएं।




