अंबिकापुर।खबरी गुल्लक
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र में आदिवासी भुईया समाज के कई परिवारों के पुश्तैनी मकान और खेती की भूमि पर कथित रूप से जबरदस्ती कब्जा, जेसीबी से घर गिराने और मारपीट-धमकी का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की मांग की है, जबकि स्थानीय थाने में शिकायत नहीं सुने जाने का आरोप भी लगाया गया है। यह घटना ग्राम सरहरी थाना व तहसील प्रतापपुर में 10 जुलाई 2026 को बताई गई, बाद में 13 जुलाई 2026 को फिर धमकी का आरोप है। आवेदक शिवप्रसाद भुईयां, महेश राम, रजन राम भुईया, समत राम ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि खसरा 917/1, 909, 910, 912, 913, 916/1 में वर्षों से निवास व खेती कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि संध्या अग्रवाल, सचिन कुमार अग्रवाल, दिलिप कुमार देवांगन, सुनील प्रजापति जेसीबी मालिक और अन्य 9 लोगों ने जेसीबी मशीन के साथ आकर मकान तोड़ दिया, लाठी-डंडे-राड से मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और बारिश में परिवार को बेघर कर दिया। मारपीट में समरथ के बाएं पैर और सुरेश के दाहिने हाथ में चोट लगने का जिक्र ज्ञापन में है। पीड़ितों ने दावा किया है कि गांव के लोगों ने मोबाइल से घर तोड़ते समय की घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया है, जो प्रमाण के रूप में उपलब्ध है।
पीड़ितों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्तियों के साथ जातिगत गाली गलौच से एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिकता स्पष्ट है। इन प्रावधानों के तहत यदि कोई व्यक्ति, जो एससी-एसटी वर्ग का नहीं है, अनुसूचित जाति/जनजाति के साथ गाली गलौच करता है तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है। आदिवासी/दलितों को गाली-ग्लौज, जातिगत अपमान, धमकी देना और मारपीट भी इस अधिनियम में गंभीर अपराध हैं। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने यह चेतावनी दी है कि सिविल विवादों को आपराधिक बनाने की प्रवृत्ति पर पुलिस को सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन जहां मारपीट, जान से मारने की धमकी और जबरन कब्जे के ठोस प्रमाण हों, वहां एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करना उचित है। इन आरोपों पर आरोपित पक्ष से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनका बयान नहीं लिया जा सका,यदि उनका बयान आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
थाने में शिकायत नहीं सुने जाने का आरोप
पीड़ित पक्ष का दावा है कि वे प्रतापपुर थाने में शिकायत करने गए, लेकिन वहां से डांट-डपट कर भगा दिया गया और शिकायत दर्ज नहीं की गई। इस कारण आरोपियों का हौसला बढ़ा और उन्होंने दोबारा धमकी दी। ऐसी स्थिति में जिला पुलिस अधीक्षक हस्तक्षेप कर थाना प्रभारी से रिपोर्ट मंगवाकर उचित कार्रवाई की जांच कर सकते हैं।
राह चलते गाड़ी चढ़ाने की धमकी
पीड़ितों के अनुसार 13 जुलाई 2026 को फिर से गुंडों को लेकर आकर धमकी दी गई कि “रात को आकर पूरा घर गिरा दूंगा” और सड़क पर गाड़ी चढ़ा देने की धमकी भी दी गई। मारपीट में समरथ और सुरेश को चोटें आईं। पीड़ितों ने दावा किया कि घटना का वीडियो मोबाइल से रिकॉर्ड किया गया है। ,घटना की जांच हेतु जिला पुलिस अधीक्षक को हस्तक्षेप करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग उठ रही है। यदि वीडियो प्रमाण मिलते हैं तो पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की चेतावनी भी दी गई है।




